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वेनेजुएला पर अमेरिकी दबाव की लंबी कहानी: ड्रग्स तस्करी, तेल भंडार या अमेरिकी दादागीरी
ट्रंप ने कई मौकों पर कहा कि अगर मादुरो खुद ही सत्ता छोड़कर देश से चले जाते हैं, तो यह उनके लिए “स्मार्ट फैसला” होगा। यह बयान अमेरिका की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसके तहत वह बिना प्रत्यक्ष युद्ध के मादुरो सरकार को कमजोर करना चाहता था।

वॉशिंगटन/काराकस। वेनेजुएला लंबे समय से अमेरिका की विदेश नीति के निशाने पर रहा है। कभी ड्रग्स तस्करी के आरोपों को लेकर, तो कभी वामपंथी तानाशाही शासन के नाम पर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को घेरने की कोशिशें होती रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में यह टकराव और तेज हो गया। ट्रंप प्रशासन ने न केवल मादुरो सरकार पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाया, बल्कि खुले तौर पर यह संकेत भी दिए कि मादुरो को सत्ता छोड़ देनी चाहिए।
“सत्ता छोड़ना ही समझदारी” का संदेश
बीते कई महीनों से अमेरिका ने वेनेजुएला की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घेरेबंदी तेज कर रखी थी। ट्रंप ने कई मौकों पर कहा कि अगर मादुरो खुद ही सत्ता छोड़कर देश से चले जाते हैं, तो यह उनके लिए “स्मार्ट फैसला” होगा। यह बयान अमेरिका की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसके तहत वह बिना प्रत्यक्ष युद्ध के मादुरो सरकार को कमजोर करना चाहता था। हालांकि, मादुरो ने इन सभी दबावों को सिरे से खारिज किया और अमेरिका पर संप्रभु देश के आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया।
आरोपों की लंबी फेहरिस्त, सबूतों की कमी
अमेरिकी प्रशासन ने मादुरो सरकार के खिलाफ आरोपों की लंबी सूची पेश की है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इन आरोपों के समर्थन में ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य कभी सामने नहीं रखे गए। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका के दावों को संदेह की नजर से देखता रहा है। अमेरिका का कहना है कि मादुरो शासन की नीतियों ने वेनेजुएला को अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और मानवाधिकार हनन का केंद्र बना दिया है। वहीं, मादुरो सरकार इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताती रही है।
प्रवासियों का मुद्दा और अमेरिका का दावा
ट्रंप प्रशासन ने मादुरो पर अमेरिका में हजारों वेनेजुएलाई प्रवासियों के पहुंचने का भी आरोप लगाया है। अमेरिकी दावों के मुताबिक, वर्ष 2013 के बाद से वेनेजुएला में गहराते आर्थिक संकट और दमनकारी नीतियों के चलते करीब 80 लाख नागरिक देश छोड़ चुके हैं, जिनमें से बड़ी संख्या अमेरिका पहुंची है। गौरतलब है कि वर्ष 2013 में ही मादुरो कम्युनिस्ट शासन के तहत सत्ता में आए थे। अमेरिका का कहना है कि इस बड़े पैमाने पर पलायन ने उसकी आव्रजन व्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
ड्रग्स तस्करी और कार्टेल के आरोप
ड्रग्स तस्करी अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव का सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। ट्रंप ने मादुरो पर अमेरिका में फेंटेनिल और कोकीन जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी बढ़ाने का आरोप लगाया। इसी क्रम में वेनेजुएला के दो आपराधिक संगठनों ट्रेन डी आरागुआ और कार्टेल डी लास सोल्स को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया।
ट्रंप का आरोप है कि ‘कार्टेल डी लास सोल्स’ खुद राष्ट्रपति मादुरो के नेतृत्व में काम करता है। हालांकि, मादुरो ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका “ड्रग्स के खिलाफ जंग” को सिर्फ एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है, ताकि उन्हें सत्ता से हटाया जा सके और वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर कब्जा किया जा सके।
विश्लेषकों की राय: कार्टेल या प्रतीकात्मक शब्द?
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ‘कार्टेल डी लास सोल्स’ कोई संगठित और एकीकृत संगठन नहीं है। उनके अनुसार, यह एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल उन भ्रष्ट सैन्य और सरकारी अधिकारियों के लिए किया जाता है, जिन्होंने कोकीन को वेनेजुएला के रास्ते आगे भेजने की अनुमति दी। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका इन आरोपों को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, ताकि मादुरो सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाया जा सके।
तेल, सत्ता और भू-राजनीति
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में शामिल है। कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की सख्ती के पीछे केवल लोकतंत्र या ड्रग्स तस्करी नहीं, बल्कि ऊर्जा संसाधनों और क्षेत्रीय प्रभाव की राजनीति भी है। कुल मिलाकर, वेनेजुएला और अमेरिका के बीच यह टकराव आरोपों, जवाबी आरोपों और भू-राजनीतिक हितों का ऐसा संगम बन चुका है, जिसका समाधान फिलहाल दूर नजर आता है।
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