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भारतीय सेना की बढ़ी ताकत: T-72 और T-90 टैंकों के लिए 975 करोड़ का करार; अब बारूदी सुरंगें भी नहीं रोक पाएंगी रास्ता

भारत के अग्रणी युद्धक टैंकों टी-72 और टी-90 टैंकों से जुड़ा एक बड़ा रक्षा सौदा किया गया। मंगलवार को किए गए इस सौदे के तहत लगभग 975 करोड़ रुपए की लागत से टी-72 और टी-90 टैंकों के ट्रॉल असेंबली की खरीद की जाएगी।

भारतीय सेना की बढ़ी ताकत: T-72 और T-90 टैंकों के लिए 975 करोड़ का करार; अब बारूदी सुरंगें भी नहीं रोक पाएंगी रास्ता
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नई दिल्ली। भारत के अग्रणी युद्धक टैंकों टी-72 और टी-90 टैंकों से जुड़ा एक बड़ा रक्षा सौदा किया गया। मंगलवार को किए गए इस सौदे के तहत लगभग 975 करोड़ रुपए की लागत से टी-72 और टी-90 टैंकों के ट्रॉल असेंबली की खरीद की जाएगी।

ट्रॉल असेंबली युद्ध के दौरान बारूदी सुरंगों (माइनफील्ड) को पार करने की सेना की क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएगी।

बता दें कि ट्रॉल, टैंकों के सामने आने वाली जमीन में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय कर देता है। इससे टैंक के लिए एक सुरक्षित रास्ता बनता है। यह रक्षा सौदा आत्मनिर्भर भारत को मजबूती देते हुए किया गया है।

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 975 करोड़ रुपए के महत्वपूर्ण रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, ये अनुबंध टी-72 और टी-90 टैंकों के लिए ट्रॉल असेंबली की खरीद से जुड़े हैं। यह अनुबंध 21 अप्रैल को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड और इलेक्ट्रो न्यूमैटिक्स एंड हाइड्रॉलिक्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के साथ किए गए।

दरअसल, ट्रॉल असेंबली एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य उपकरण है। इसे भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है। यह खास उपकरण टैंकों के आगे लगाया जाता है। इसका काम माइनफील्ड में सुरक्षित रास्ता बनाना होता है। विशेष रूप से यह एंटी-टैंक माइन, जिनमें प्रॉक्सिमिटी मैग्नेटिक फ्यूज लगे होते हैं, उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इससे युद्ध के दौरान टैंकों और अन्य सैन्य वाहनों के लिए सुरक्षित मार्ग तैयार किया जा सकेगा। वहीं इस नई प्रणाली के सेना में शामिल होने से भारतीय सेना की ऑपरेशनल क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

गौरतलब है कि माइनफील्ड वाले क्षेत्र बेहद जटिल और खतरनाक इलाकों होते हैं। हालांकि अब इन खतरनाक इलाकों में तेजी से आगे बढ़ने के लिए सेना की क्षमता बढ़ेगी। इससे युद्ध के मैदान में रणनीतिक बढ़त हासिल करने में मदद मिलेगी।

यह खरीद ‘बाय इंडियन-इंडिजिनसली डिजाइन, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड’ श्रेणी के अंतर्गत की गई है। साथ ही यह पूरी तरह से देश में डिजाइन, विकास और निर्माण को प्रोत्साहित करती है। यह कदम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

मंत्रालय का कहना है कि इसके अलावा, इस परियोजना से देश में रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। इसका लाभ विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा मिलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रॉल असेंबली के विभिन्न पुर्जों के निर्माण में इनकी भागीदारी रहेगी। इससे रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में घरेलू उद्योगों की भागीदारी और क्षमता दोनों में वृद्धि होगी।

रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि यह पहल न केवल भारतीय सेना की युद्धक क्षमता को आधुनिक बनाएगी, बल्कि देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य को भी तेजी से आगे बढ़ाएगी।



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