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केएसके का काम बंद, भू-विस्थापितों का फिर आंदोलन

केएसके महानदी पावर कंपनी प्रबंधन व हिंद मजदूर सभा के बीच हुये त्रिपक्षीय वार्ता से वादाखिलाफी का आरोप प्रबंधन पर लगाते हुये आज संयंत्र में टूलटाउन करते हुये मजदूरों ने काला फीता लगाकर प्रदर्शन किया

केएसके का काम बंद, भू-विस्थापितों का फिर आंदोलन
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स्थायी नौकरी के बजाय ठेका श्रमिक बनाने पर भड़के भू-विस्थापित

जांजगीर। केएसके महानदी पावर कंपनी प्रबंधन व हिंद मजदूर सभा के बीच हुये त्रिपक्षीय वार्ता से वादाखिलाफी का आरोप प्रबंधन पर लगाते हुये आज संयंत्र में टूलटाउन करते हुये मजदूरों ने काला फीता लगाकर प्रदर्शन किया।

विदित हो कि हाल ही में हुई त्रि-पक्षीय वार्ता में कंपनी प्रबंधन ने भूविस्थापितों को नियुक्ति पत्र देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन प्रबंधन उन्हें ठेका श्रमिक बनाना चाह रहा है।

इसके आक्रोशित भू-विस्थापित आज सुबह से प्लांट का काम बंद कराकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इधर, प्लांट के बिकने की खबर से भू-विस्थापित अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है।

केएसके महानदी पावर कंपनी स्थापना के लिए नरियरा सहित आसपास गांवों की बड़ी मात्रा में जमीन अधिग्रहित की है, लेकिन प्रबंधन भू-विस्थापितों को नौकरी देने शुरू से आनाकानी कर रहा है। इसके विरोध में भू-विस्थापितों का आंदोलन सालों से चल रहा है।

इस बीच प्रशासन, प्रबंधन और भू-विस्थापितों की कई बार त्रि-पक्षीय वार्ता भी हुई, जिसमें भू-विस्थापितों को नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र देने का निर्देश कंपनी प्रबंधन को दिया गया। वार्ता में नियुक्ति पत्र देने के लिए राजी होने के बाद कंपनी प्रबंधन एक बार फिर समय सीमा बीत जाने के बाद में वादाखिलाफी पर उतर आया है।

यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। कंपनी प्रबंधन भू-विस्थापितों को ठेका श्रमिक बनाना चाह रहा है। इसका विरोध आज सुबह से भू-विस्थापित परिवार से जुड़े सदस्य काला फीता लगाकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इनके विरोध व आंदोलन के कारण आज सुबह से वर्धा पावर प्लांट का काम ठप है।

कई कोयले से भरी गाड़ियां अनलोडिंग के लिए सुबह से खड़ी है। उल्लेखनीय है कि कंपनी स्थापना के लिए प्रबंधन ने बैंक से 18 करोड़ रुपए का लोन लिया है, जिसे चुका पाने में प्रबंधन नाकाम है। ऐसे में यह कंपनी को बेचने के लिए निविदा की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

ऐसे में भू-विस्थापित अब आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए धरना-आंदोलन पर उतर आये है, इधर प्रशासन इस आंदोलन के मददेनजर प्लांट परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

तो सीएम निवास के सामने करेंगे प्रदर्शन
इस संबंध में हिंद मजदूर कार्यवाहक के प्रदेशाध्यक्ष एच मिश्रा ने कहा कि प्रभावित परिवारों के प्रति प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से बचता रहा और प्रशासन शीघ्र हस्तक्षेप कर भूविस्थापितों को हक दिलाने में नाकाम रही, तो जल्द ही प्रदेश भर के हिंद मजदूर सभा यूनियन राजधानी पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास के सामने प्रदर्शन व घेराव करेगी।

शिफ्ट खत्म होने के बाद भी निकलने के लिए करना पड़ता है इंतजार
प्लांट के मुख्य द्वार के पास श्रमिकों एवं भू-विस्थापितों के आंदोलन एवं उग्र प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए प्लांट प्रबंधन ने मुख्य द्वार पर ताला लगवा दिया था। जिसके चलते कर्मचारियों को अपनी शिफ्ट ड्यूटी खत्म होने के बाद भी बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।

दोपहर दो बजे खत्म हो चुकी थी, लेकिन शाम साढ़े छह बजे तक निकलने इंतजार करना पड़ा। मौके पर काफी तनाव की स्थिति के मद्देनजर पुलिस बल को चप्पे-चप्पे पर तैनात किया गया है।

उत्पादन हुआ ठप्प
धरना-आंदोलन शुरू होने की खबर के बाद प्लांट के अंदर मौजूद श्रमिकों ने 500 मेगावॉट के रनिंग प्लांट को बंद करवा दिया है, जिसके चलते करीब चार घंटे से विद्युत उत्पादन ठप है।

इसके साथ ही अंदर में मौजूद श्रमिक भी प्लांट प्रबंधन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर कर रहे हैं। इधर, मुख्य द्वार के ठीक सामने बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मौजूद हैं, जो नारेबाजी कर प्रबंधन के प्रति अपना गुस्सा जता रहे हैं।

बताया जा रहा है कि आंदोलन की खबर पाकर कई दलों के नेता भी लगातार मौके पर पहुंचकर श्रमिकों के साथ अपनी आवाज बुलंद करने में जुट रहे हैं।


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