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पश्चिम बंगाल की ओर कूच कर रहे हैं किसान ,नए कृषि कानून को रद्द करने की है मांग

किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं. लेकिन सरकार चुनावी राज्यों में अपना दमखम दिखाने में जुटी है

पश्चिम बंगाल की ओर कूच कर रहे हैं किसान ,नए कृषि कानून को रद्द करने की है मांग
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किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं. लेकिन सरकार चुनावी राज्यों में अपना दमखम दिखाने में जुटी है. खासकर पश्चिम बंगाल में बीजेपी इन दिनों सक्रिय है. ऐसे में अब किसान दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के बाद पश्चिम बंगाल की ओर कूच करने की तैयारी में है. जिसके चलते आज किसान नेता राकेश टिकैत नंदीग्राम में रैली करेंगे.जनता सरकार से उम्मीद लगाए बैठती है कि सरकार उन्हें राहत देगी. इसी तरह किसान भी उम्मीद लगाए हुए था कि सरकार उनके हित में काम करेगी. लेकिन आलम ये है कि किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठा है. नए कृषि कानून की मुखालफत कर रहा है. लेकिन सरकार किसानों की सुनने को तैयार ही नहीं है. केंद्र सरकार के साथ 11 दौर की बातचीत में उन्हें कोई सफलता हाथ नहीं लगी. लेकिन फिर भी उनका संकल्प दृढ़ है और उम्मीद है कि जीत उन्हें ही मिलेगी. ऐसे में किसानों ने अब मोदी सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोल लिया है. जिससे बीजेपी की मुश्किल बढ़ना तय है. किसान अब दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के बाद पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ रहे हैं. जिसके चलते कई किसान नेता बंगाल पहुंच चुके हैं. और वहां के किसानों को बीजेपी को वोट ना करने के लिए समझा रहे हैं. हालांकि, किसान नेता राकेश टिकैत ने बंगाल जाने से पहले ये स्पष्ट किया था कि वो किसी भी दल के समर्थन में वोट नहीं मांगेंगे. उनका मकसद है कि भारतीय जनता पार्टी का बहिष्कार कर मोदी सरकार का अभिमान तोड़ा जाए. और इसी के चलते आज किसान नेता राकेश टिकैत नंदीग्राम और कोलकाता में रैली करेंगे. इसके अलावा कोलकाता में होने वाली महापंचायत रैली में भी राकेश टिकैत हिस्सा लेंगे. इसके बाद शाम चार बजे नंदीग्राम से किसान सरकार की तरफ से लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ भाषण देंगे. इसी के साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा ने 12 से 14 मार्च के बीच बंगाल की राजधानी कोलकाता, नंदीग्राम, सिंगूर, आसनसोल में लगातार रैलियां, रोड शो, जनसभाएं और किसान महापंचायतें करने की तैयारी की है. वहीं, 26 मार्च को अब किसानों ने भारत बंद बुलाया है. आपको बता दें, कि किसान लगातार मांग कर रहा है सरकार किसानों के लिए लाए नए कृषि कानून को रद्द कर दे. लेकिन सरकार उसमें संशोधन को तो तैयार है. लेकिन कानून रद्द करने के लिए तैयार नहीं है. ऐसे में अब किसानों ने ठान लिया है कि सरकार से अपनी मांग पूरी करवा के ही रहेंगे. जिसके बाद अब किसानों के आगे आखिर कब तक सरकार ऐसे ही कायम रहेगी. ये तो समय आने पर ही पता चलेगा.


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