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वीडी सतीशन सरकार केरल के लिए नए ब्रॉड गेज हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर कर रही विचार

केरल के सीएम वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार ने राज्य के विवादित सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट को औपचारिक रूप से खत्म कर दिया है

वीडी सतीशन सरकार केरल के लिए नए ब्रॉड गेज हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पर कर रही विचार
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तिरुवनंतपुरम। केरल के सीएम वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार ने राज्य के विवादित सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट को औपचारिक रूप से खत्म कर दिया है और अब एक वैकल्पिक ब्रॉड-गेज हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर विचार कर रही है, जिससे राज्य में एक बड़ी राजनीतिक और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी बहस का मंच तैयार हो गया है।

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विपक्ष के नेता के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान सतीशन ने खुद ही 63,000 करोड़ रुपए के सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट के खिलाफ केरल के सबसे बड़े राजनीतिक अभियानों में से एक का नेतृत्व किया था, चाहे वह विधानसभा के अंदर हो या सड़कों पर।

इस प्रोजेक्ट के कारण भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय चिंताओं और विस्थापन के डर को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, खासकर तब जब पिछली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया-मार्क्सवादी (सीपीआई-एम) के नेतृत्व वाली सरकार ने कई जिलों में विवादित पीले रंग के सर्वे पत्थर लगाने शुरू कर दिए थे।

पूरे आंदोलन के दौरान वीडी सतीशन ने बार-बार वादा किया था कि भविष्य की यूडीएफ सरकार इस प्रोजेक्ट को रद्द कर देगी, जिसे उन्होंने आर्थिक रूप से अव्यवहारिक और पर्यावरण के लिए विनाशकारी बताया था।

इस अभियान को 'मेट्रो मैन' ई. श्रीधरन से भी कड़ी आलोचना मिली थी। उन्होंने सिल्वरलाइन मॉडल का विरोध किया था और भारतीय रेलवे के अनुकूल ब्रॉड गेज प्रणाली के बजाय 'स्टैंडर्ड गेज' अपनाने के फैसले पर सवाल उठाया था।

अब जब यूडीएफ सत्ता में है, तो सरकार ने रेल मंत्रालय की नीतियों के अनुरूप एक नया प्रस्ताव तैयार करना शुरू कर दिया है।

नई योजना में एक ब्रॉड-गेज सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है, जो यात्री सेवाओं (जिसमें वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें भी शामिल हैं) और माल ढुलाई दोनों को संभालने में सक्षम होगा।

प्रस्तावित कॉरिडोर से तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक 580 किलोमीटर की दूरी लगभग साढ़े चार घंटे में तय होने की उम्मीद है, जिसमें ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से चलेंगी।

सरकार भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए खंभों पर निर्मित एक बड़े हिस्से वाले 'एलिवेटेड अलाइनमेंट' (ऊंचाई पर बने मार्ग) पर भी विचार कर रही है।

अधिकारियों ने संकेत दिया कि रेल मंत्रालय से मंजूरी और तकनीकी सहायता मांगने से पहले राज्य सरकार श्रीधरन से सीधे मार्गदर्शन लेगी।

जल्द ही एक नया 'फिजिबिलिटी स्टडी' (संभाव्यता अध्ययन) शुरू होने की उम्मीद है। इस बीच, राजस्व मंत्री एपी अनिल कुमार ने सिल्वरलाइन भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान लगाए गए लगभग 8,000 पीले सीमा पत्थरों को हटाने का आदेश दिया है। इन पत्थरों को लगाने में अनुमानित तौर पर 1.62 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। जमीन मालिकों को भी औपचारिक रूप से सूचित किया जाएगा कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया रद्द कर दी गई है।

प्रस्तावित कॉरिडोर के मौजूदा रेलवे नेटवर्क के साथ नियमित अंतराल पर जुड़ने की उम्मीद है, और इसमें विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह से जुड़े 'रोल-ऑन/रोल-ऑफ' माल ढुलाई सिस्टम भी शामिल हो सकते हैं जिससे माल ढुलाई (कार्गो लॉजिस्टिक्स) और औद्योगिक विकास को जबरदस्त बढ़ावा मिलने की संभावना है।


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