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केरल चुनाव से पहले थरूर-सतीशन की मुलाकात, कांग्रेस में एकजुटता का संदेश

केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में आंतरिक एकजुटता दिखाने की कोशिशों के तहत नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन ने शनिवार को पार्टी सांसद शशि थरूर से उनके आवास पर मुलाकात की

केरल चुनाव से पहले थरूर-सतीशन की मुलाकात, कांग्रेस में एकजुटता का संदेश
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थरूर ने जताई चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा

  • कांग्रेस हाईकमान की रणनीति: अंदरूनी मतभेद खत्म कर एकजुट मोर्चा
  • “केवल एक ही पार्टी” - थरूर ने कांग्रेस के प्रति निष्ठा दोहराई
  • यूडीएफ को थरूर की लोकप्रियता से चुनावी बढ़त की उम्मीद

तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में आंतरिक एकजुटता दिखाने की कोशिशों के तहत नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन ने शनिवार को पार्टी सांसद शशि थरूर से उनके आवास पर मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पिछले कुछ हफ्तों से थरूर के राजनीतिक भविष्य को लेकर पार्टी में असहजता और अटकलों का दौर चल रहा था।

थरूर के आवास पर हुई इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा हुई। इसे कांग्रेस हाईकमान की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत अंदरूनी मतभेदों को खत्म कर चुनाव से पहले एकजुटता का संदेश दिया जाए।

सूत्रों के अनुसार, शशि थरूर ने चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने की अपनी इच्छा जाहिर की है। वह पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र और विज़न डॉक्यूमेंट के मसौदे में योगदान दे सकते हैं। इसके अलावा, युवाओं और पेशेवर वर्ग के साथ संरचित संवाद कार्यक्रमों की अगुवाई भी कर सकते हैं। यूडीएफ नेतृत्व का मानना है कि इससे पारंपरिक वोट बैंक से बाहर भी पार्टी की पहुंच बढ़ सकती है।

इस मेल-मिलाप की पहल एआईसीसी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने की, जबकि वरिष्ठ नेता ए.के. एंटनी ने संतुलन बनाने में अहम भूमिका निभाई। हाल ही में वायनाड में हुए सम्मेलन के दौरान वेणुगोपाल ने व्यक्तिगत रूप से थरूर को केरल की राजनीति में उनकी प्रासंगिकता का भरोसा दिलाया था। इसके बाद सतीशन समेत राज्य नेतृत्व की ओर से लगातार संवाद किया गया।

गौरतलब है कि तीन दिन पहले ही शशि थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्होंने कहा था कि वे सभी एक ही सोच पर हैं।

मीडिया से बात करते हुए थरूर ने दोहराया कि उनके जीवन में “केवल एक ही पार्टी” है और उनका एकमात्र लक्ष्य कांग्रेस और यूडीएफ की जीत सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी खारिज किया कि पार्टी कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी किसी दबाव का नतीजा है।

थरूर के पार्टी में मजबूती से बने रहने से यूडीएफ खेमे में उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि युवाओं और गैर-राजनीतिक मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता चुनाव में निर्णायक साबित हो सकती है।


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