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चुनाव नतीजों के बाद शशि थरूर का कांग्रेस को आत्ममंथन की सलाह, मोदी-शाह की रणनीति की सराहना

शशि थरूर ने माना कि केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को अच्छी सफलता मिली है, जो पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल एक राज्य की जीत से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता।

चुनाव नतीजों के बाद शशि थरूर का कांग्रेस को आत्ममंथन की सलाह, मोदी-शाह की रणनीति की सराहना
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तिरुअनंतपुरम : Assembly Election Results 2026: विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। अपनी स्पष्ट और बेबाक राय के लिए जाने जाने वाले थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक क्षमता की खुलकर सराहना की है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पार्टी को अपने प्रदर्शन पर गंभीरता से आत्ममंथन करने की सलाह भी दी है।

केरल में जीत, लेकिन बाकी राज्यों में चिंता

शशि थरूर ने माना कि केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को अच्छी सफलता मिली है, जो पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल एक राज्य की जीत से संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता। उन्होंने अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन की ओर इशारा करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने कमजोर पक्षों को पहचानना होगा। थरूर के अनुसार, चुनावी नतीजे यह संकेत देते हैं कि पार्टी को अपनी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे पर नए सिरे से काम करने की जरूरत है।

मोदी-शाह की रणनीति की सराहना

थरूर ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा के प्रदर्शन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने प्रभावी चुनावी रणनीति अपनाई और मजबूत संगठन के दम पर सफलता हासिल की। उन्होंने कहा, “मोदी और शाह ने बंगाल और असम में अच्छा काम किया है। उनकी संगठनात्मक क्षमता काफी मजबूत है और हम सभी को इससे सीख लेनी चाहिए।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब भाजपा इन राज्यों में अपने प्रदर्शन को लेकर सुर्खियों में है।

भाजपा का बढ़ता प्रभाव

चुनाव परिणामों के अनुसार, भाजपा पश्चिम बंगाल में पहली बार सरकार बनाने की स्थिति में है, जो राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। वहीं असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है, जो उसकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है। इसके अलावा, तमिलनाडु में भी राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं, जहां एक नई पार्टी के उभरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। पुडुचेरी में भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की वापसी के संकेत मिल रहे हैं।

कांग्रेस के लिए सीख और चुनौती

थरूर ने कहा कि चुनावी नतीजे केवल जीत-हार तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे पार्टियों के लिए सीखने का अवसर भी होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस को अपनी कमजोरियों को स्वीकार कर उन्हें दूर करने की दिशा में काम करना चाहिए। उनके मुताबिक, पार्टी को जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी और संगठन को अधिक सक्रिय एवं प्रभावी बनाना होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बदलते राजनीतिक माहौल में नई रणनीतियों को अपनाना जरूरी है।

पहले भी कर चुके हैं खुलकर टिप्पणी

यह पहली बार नहीं है जब शशि थरूर ने पार्टी लाइन से अलग जाकर अपनी राय रखी हो। इससे पहले भी वे कई मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर चुके हैं, जिसमें “ऑपरेशन सिंदूर” जैसे विषय शामिल हैं। उनकी इस तरह की टिप्पणियां कई बार कांग्रेस के भीतर असहजता पैदा करती रही हैं, लेकिन थरूर अपने विचार खुलकर रखने के लिए जाने जाते हैं।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

थरूर के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। जहां भाजपा नेताओं ने उनकी टिप्पणी का स्वागत किया है, वहीं कांग्रेस के भीतर इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थरूर का यह बयान कांग्रेस के भीतर आत्ममंथन की जरूरत को उजागर करता है और आने वाले समय में पार्टी की रणनीति पर असर डाल सकता है।


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