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विदेशी अंशदान (नियमन) संशोधन विधेयक-2026 को लेकर केरल के मुख्यमंत्री ने पीएम को लिखा पत्र

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने विदेशी अंशदान (नियमन) संशोधन विधेयक-2026 को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है

विदेशी अंशदान (नियमन) संशोधन विधेयक-2026 को लेकर केरल के मुख्यमंत्री ने पीएम को लिखा पत्र
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तिरुवनंतपुरम। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने विदेशी अंशदान (नियमन) संशोधन विधेयक-2026 को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने इसे नागरिक समाज और अल्पसंख्यक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सीधे हमले जैसा बताया है।

पत्र शेयर करते हुए उन्होंने लिखा कि तकनीकी कारणों पर संपत्तियों पर कब्जा करने की व्यापक शक्ति देकर, केंद्र सरकार मनमाने नियंत्रण और डराने-धमकाने का उपकरण बना रही है। मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इन कठोर प्रावधानों को वापस लेने का अनुरोध किया है, जो गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों की सेवा करने वाली संस्थाओं के लिए खतरा हैं। हमें अपने संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि निस्वार्थ सेवा की भावना कार्यपालिका के हस्तक्षेप से दबाई न जाए।

पीएम को भेजे पत्र में सीएम पिनाराई ने लिखा कि विदेशी अंशदान (नियमन) संशोधन विधेयक, 2026, जो 25 मार्च, 2026 को लोकसभा में प्रस्तुत किया गया, में कुछ प्रावधान शामिल हैं, जिन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर अल्पसंख्यक समुदायों में आशंका और चिंता पैदा कर दी है। विधेयक की धाराओं के अवलोकन पर यह देखा गया है कि यहां तकनीकी खामियों के लिए भी संपत्तियों पर कब्जा करने की शक्तियां प्रदान की गई हैं।

पत्र में लिखा है कि संभावना यह है कि इस प्रकार की व्यापक शक्ति अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से इस्तेमाल की जा सकती है और इस प्रकार की आशंकाओं को निराधार नहीं माना जा सकता। वर्तमान अधिनियम पहले ही प्रमाण पत्र धारकों द्वारा लाभ के दुरुपयोग से निपटने के लिए पर्याप्त शक्तियां प्रदान करता है, जिन्हें विदेशी अंशदान स्वीकार करने की अनुमति दी गई है।

उन्होंने आगे लिखा कि संशोधन में संपत्तियों पर कब्जा करने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है, जिसमें धार्मिक स्थल और धर्मार्थ संस्थाएं भी शामिल होंगी, भले ही समय सीमा के तकनीकी प्रश्न हों। यह ध्यान देने योग्य है कि संशोधन विधेयक की धाराएं उन संस्थाओं के कामकाज को कठिनाइयों में डाल सकती हैं, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीब तथा हाशिए पर रहे लोगों की सेवा में निस्वार्थ रूप से कार्यरत हैं, भले ही उनकी ओर से कोई गंभीर गलती न हुई हो।

उन्होंने लिखा है कि यह मामला धार्मिक समूहों और अल्पसंख्यक समुदायों की चिंताओं से जुड़ा है, अतः मैं प्रधानमंत्री से निवेदन करता हूं कि वे शीघ्र हस्तक्षेप करें और संशोधन विधेयक में संपत्तियों पर कब्जा करने के प्रावधान को वापस लेने की पहल करें, क्योंकि वर्तमान कानून में उल्लंघनों से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।


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