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केरल विधानसभा चुनाव: हाई-वोल्टेज प्रचार थमा, अब मतदाताओं की बारी

केरल विधानसभा चुनाव के लिए तीन हफ्तों से अधिक समय तक चले जोरदार और हाई-वोल्टेज चुनाव प्रचार का मंगलवार शाम 6 बजे समापन हो गया। इसके साथ ही पूरा राज्य उत्साह और राजनीतिक गतिविधियों के चरम पर पहुंच गया है

केरल विधानसभा चुनाव: हाई-वोल्टेज प्रचार थमा, अब मतदाताओं की बारी
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तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव के लिए तीन हफ्तों से अधिक समय तक चले जोरदार और हाई-वोल्टेज चुनाव प्रचार का मंगलवार शाम 6 बजे समापन हो गया। इसके साथ ही पूरा राज्य उत्साह और राजनीतिक गतिविधियों के चरम पर पहुंच गया है।

प्रचार के आखिरी दिन वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ), संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कार्यकर्ता और उम्मीदवार सड़कों पर उतरे और शक्ति प्रदर्शन किया। रोड शो, ढोल-नगाड़े, रंग-बिरंगे जुलूस और नारेबाजी के बीच पूरे राज्य में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

यह केरल की चुनावी संस्कृति की खास झलक रही, जहां प्रचार के अंतिम दिन को किसी बड़े आयोजन की तरह मनाया जाता है। कई लोगों के लिए यह किसी राजनीतिक नाटक के अंतिम दृश्य जैसा महसूस हुआ।

अब बुधवार को “शांत प्रचार” (साइलेंट कैंपेन) का दिन होगा, जब सभी राजनीतिक दलों को प्रचार से विराम लेना होगा। इस दौरान नेता अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में रहकर अंतिम रणनीति तैयार करेंगे।

गुरुवार को मतदान होगा, जहां 2.71 करोड़ से अधिक मतदाता ईवीएम के जरिए अपने मताधिकार का प्रयोग कर राज्य की अगली सरकार का फैसला करेंगे।

इस चुनाव में मुख्य मुकाबला मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के बीच माना जा रहा है। विजयन लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटकर इतिहास रचने की कोशिश में हैं।

वहीं, कांग्रेस की ओर से स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी ने वायनाड में प्रचार करते हुए दावा किया कि यूडीएफ इस बार बड़ी जीत हासिल कर सरकार बनाएगा।

उधर, भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए भी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भरोसा जताया है कि पार्टी इस बार विधानसभा में अपना खाता खोलने के साथ कई सीटें जीत सकती है।

पूरे चुनाव प्रचार के दौरान तीखे बयान, बड़े रोड शो और नेताओं के बीच जुबानी हमले भी देखने को मिले, जिससे माहौल और अधिक गरमाया रहा। किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए राज्यभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

अब जब प्रचार का शोर थम गया है, केरल निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। दावे और भरोसे अपनी जगह हैं, लेकिन अंतिम फैसला अब मतदाताओं के हाथ में है।


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