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केरल विधानसभा में जी. सुधाकरन ने युवाओं और वामपंथी विचारधारा पर उठाए सवाल

केरल विधानसभा में वरिष्ठ नेता जी सुधाकरन ने अपनी वापसी को यादगार बना दिया। 16वीं केरल विधानसभा में निर्दलीय विधायक के रूप में दिए गए अपने पहले भाषण में उन्होंने राज्य की सांस्कृतिक स्थिति, युवाओं की सोच, मौजूदा राजनीति और यहां तक कि वामपंथी विचारधारा की दिशा पर भी तीखे सवाल उठाए।

केरल विधानसभा में जी. सुधाकरन ने युवाओं और वामपंथी विचारधारा पर उठाए सवाल
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तिरुवनंतपुरम। केरल विधानसभा में मंगलवार को वरिष्ठ नेता जी सुधाकरन ने अपनी वापसी को यादगार बना दिया। 16वीं केरल विधानसभा में निर्दलीय विधायक के रूप में दिए गए अपने पहले भाषण में उन्होंने राज्य की सांस्कृतिक स्थिति, युवाओं की सोच, मौजूदा राजनीति और यहां तक कि वामपंथी विचारधारा की दिशा पर भी तीखे सवाल उठाए।

सुधाकरन का यह भाषण इसलिए भी खास था क्योंकि वह कभी सीपीआई (एम) के सबसे प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे और पांच दशक से अधिक समय तक पार्टी से जुड़े रहे। वह चार बार विधायक रहे और 2016 से 2021 तक पहली पिनाराई विजयन सरकार में लोक निर्माण मंत्री भी रहे। हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव में सीपीआई (एम) ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच संबंधों में खटास आ गई।

हालिया विधानसभा चुनाव में जब उन्होंने दोबारा चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया तो कांग्रेस नीत यूडीएफ ने उनके पारंपरिक अंबालापुझा क्षेत्र में उनका समर्थन किया। अपनी पूर्व पार्टी के कड़े विरोध के बावजूद जी. सुधाकरन ने शानदार जीत दर्ज की, जिसे चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक जीतों में से एक माना गया।

यूडीएफ ने उन्हें सम्मान देते हुए प्रोटेम स्पीकर चुना, जिसके बाद उन्होंने विधानसभा के 139 विधायकों को शपथ दिलाई।

विधानसभा में अपने पहले भाषण में जी. सुधाकरन ने कहा कि केरल का सांस्कृतिक क्षेत्र गिरावट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आज कई सांस्कृतिक हस्तियां केवल 'चापलूस' बनकर रह गई हैं। उन्होंने युवाओं में बढ़ते नशे की लत पर चिंता जताई और युवा राजनीतिक कार्यकर्ताओं की वैचारिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आज के कितने कम्युनिस्टों ने वास्तव में 'कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो' पढ़ा है।

जी. सुधाकरन ने सोवियत संघ के पतन का जिक्र करते हुए पूछा कि आखिर उसका पतन क्यों हुआ और केरल को 'सोशल डेमोक्रेसी' की राह पर चलना चाहिए या 'पीपुल्स डेमोक्रेसी' की दिशा में बढ़ना चाहिए।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त किया, लेकिन सरकार की कार्यशैली पर भी अप्रत्यक्ष निशाना साधा। उन्होंने विवादित 'येलो मार्कर' अभियान का मजाक उड़ाते हुए कहा कि केवल प्रतीकात्मक कार्यक्रमों से सामाजिक परिवर्तन नहीं लाया जा सकता। उन्होंने कहा, "न्यू केरल या रेनेसां केरल की बातें करने भर से पुनर्जागरण नहीं आता।"

जी. सुधाकरन ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की और खनिज रेत के कथित अवैध खनन पर कार्रवाई की भी मांग उठाई।


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