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केरल हाई कोर्ट की फटकार के बाद, तिरुवनंतपुरम कॉरपोरेशन के 19 भाजपा पार्षदों ने दोबारा शपथ ली

तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन के 19 भाजपा पार्षदों ने दोबारा शपथ ली। इससे पहले दिन में केरल हाई कोर्ट ने उनकी पिछली शपथ को अमान्य घोषित कर दिया था

केरल हाई कोर्ट की फटकार के बाद, तिरुवनंतपुरम कॉरपोरेशन के 19 भाजपा पार्षदों ने दोबारा शपथ ली
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तिरुवनंतपुरम। तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन के 19 भाजपा पार्षदों ने बुधवार को दोबारा शपथ ली। इससे पहले दिन में केरल हाई कोर्ट ने उनकी पिछली शपथ को अमान्य घोषित कर दिया था, क्योंकि उन्होंने कई देवी-देवताओं और शहीदों के नाम पर शपथ ली थी। इस घटनाक्रम से राज्य की राजधानी में एक नए राजनीतिक टकराव की स्थिति बन गई है।

मेयर वीवी राजेश ने कॉर्पोरेशन कार्यालय में आयोजित एक विशेष समारोह में पार्षदों को शपथ दिलाई। शपथ लेने वालों में डिप्टी मेयर आशा नाथ और अन्य पार्षद शामिल थे। विपक्ष इस समारोह से दूर रहा।

यह दोबारा शपथ ग्रहण समारोह हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद हुआ है, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों के बाद 20 भाजपा पार्षदों द्वारा ली गई शपथ को अमान्य घोषित कर दिया गया था।

कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया था कि वे चार हफ्ते के अंदर केरल नगरपालिका अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार फिर से शपथ लें और यह भी कहा कि तब तक वे चुने हुए सदस्यों के अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

हालांकि, बुधवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही यह विवाद खत्म नहीं हुआ।

एलडीएफ ने स्थानीय स्व-शासन विभाग के प्रधान सचिव के पास शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि दोबारा शपथ लेने की प्रक्रिया में हाई कोर्ट की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया और इस प्रक्रिया की आधिकारिक जांच की मांग की।

अपने अहम फैसले में हाई कोर्ट ने साफ किया था कि चुने हुए प्रतिनिधि या तो ईश्वर के नाम पर शपथ ले सकते हैं या फिर गंभीरता से प्रतिज्ञा (सत्यनिष्ठ प्रतिज्ञान) कर सकते हैं।

जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन ने कहा कि केरल नगरपालिका अधिनियम में 'ईश्वर' शब्द की विस्तृत व्याख्या का कोई प्रावधान नहीं है, इसलिए कई देवी-देवताओं के नाम पर ली गई शपथ को कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने इस बात का जिक्र करते हुए बताया कि कई देवी-देवताओं के नामों को शामिल करने के लिए कानूनी फॉर्मेट में बदलाव क्यों नहीं किया जा सकता।

भाजपा इस बात पर जोर दे रही है कि उसने कोर्ट के निर्देशों का पालन किया है और एलडीएफ अपनाए गए तरीके पर सवाल उठा रहा है, ऐसे में अब यह मामला कानूनी और राजनीतिक जांच के एक और दौर की ओर बढ़ता दिख रहा है।


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