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केरल में उप नेता प्रतिपक्ष पद को लेकर विवाद, सीपीआई ने पिनाराई विजयन से विचार करने की मांग की

केरल में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के भीतर उप नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है

केरल में उप नेता प्रतिपक्ष पद को लेकर विवाद, सीपीआई ने पिनाराई विजयन से विचार करने की मांग की
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तिरुवनंतपुरम। केरल में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के भीतर उप नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एलडीएफ की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने सोमवार को इस मुद्दे पर अपना रुख और सख्त कर दिया।

अब सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव डी राजा भी इस विवाद में खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने साफ कहा कि एलडीएफ के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन सहयोगी दलों की मांगों को नजरअंदाज नहीं कर सकते और उन्हें उनकी चिंताओं को ध्यान में रखना होगा।

डी राजा का हस्तक्षेप इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उप नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल सीपीआई (एम) और सीपीआई के बीच का मामला नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक रूप से चर्चा का विषय बन चुका है।

सीपीआई नेतृत्व अब विजयन के सार्वजनिक रुख को एलडीएफ नेतृत्व के सामने उठाने की तैयारी कर रहा है, जबकि यह मुद्दा अब तक दोनों दलों के बीच द्विपक्षीय बातचीत का हिस्सा था।

यह घटनाक्रम वाम गठबंधन की दो प्रमुख पार्टियों के बीच मतभेदों के अब खुलकर सामने आने का संकेत माना जा रहा है।

सीपीआई अपने राज्य सचिव बिनॉय विश्वम को उप नेता प्रतिपक्ष का पद देने की मांग कर रही है। बिनॉय विश्वम ने कई बार सार्वजनिक रूप से यह मांग उठाई है।

हालांकि, पिनाराई विजयन ने इस मांग को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

विवाद उस समय फिर तेज हो गया जब विजयन ने सार्वजनिक रूप से यह जानकारी दी कि सीपीआई ने इस पद को लेकर एक पत्र भेजा है।

इसके जवाब में बिनॉय विश्वम ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी मांग पूरी तरह उचित है और पूर्व मुख्यमंत्री को इस मामले में अधिक परिपक्वता दिखानी चाहिए। अब डी राजा के हस्तक्षेप से सीपीआई के रुख को राष्ट्रीय स्तर का समर्थन मिल गया है।

सूत्रों के अनुसार, गठबंधन के अन्य सहयोगी दल भी इस गतिरोध और इस मुद्दे को संभालने के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं।

सरकार के 100 दिन पूरे होने के साथ उप नेता प्रतिपक्ष का मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है। कई लोग मानते हैं कि विपक्षी गतिविधियों में समन्वय की कमी का एक कारण यह विवाद बढ़ रहा है।

सीपीआई का राज्य नेतृत्व अब एलडीएफ अध्यक्ष के रूप में पिनाराई विजयन के खिलाफ और कड़ा रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है। साथ ही, गतिरोध खत्म करने के लिए वाम दलों के राष्ट्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप की भी उम्मीद कर रहा है।


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