Top
Begin typing your search above and press return to search.

केरल में मतदाता सूची पर बवाल, कांग्रेस ने मांगा आयोग का हस्तक्षेप

केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) ने राज्य में चल रही मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की

केरल में मतदाता सूची पर बवाल, कांग्रेस ने मांगा आयोग का हस्तक्षेप
X

18 लाख नाम बाहर, एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल

  • ‘अवैज्ञानिक बूथ परिसीमन’ से बढ़ी अराजकता: केपीसीसी का आरोप
  • बुजुर्ग और ग्रामीण मतदाता सबसे ज्यादा प्रभावित
  • कांग्रेस ने पारदर्शी और त्रुटिरहित सूची की मांग उठाई

तिरुवनंतपुरम। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) ने शनिवार को राज्य में चल रही मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में गंभीर भ्रम और बड़े पैमाने पर अव्यवस्था पैदा हो गई है, जिससे लाखों वास्तविक मतदाताओं के मतदान अधिकार से वंचित होने का खतरा है।

केपीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष पी.सी. विष्णुनाथ विधायक के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपाध्यक्ष एम. विंसेंट विधायक और मैथ्यू कुज़लनादन विधायक के साथ मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) रतन यू. केलकर से मुलाकात की और अपनी चिंताओं को विस्तार से रखा।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि त्रुटिपूर्ण प्रक्रियाओं, अवैज्ञानिक वार्ड और बूथ परिसीमन तथा लिपिकीय गलतियों के चलते पूरे केरल में मतदाताओं के लिए अराजक स्थिति पैदा हो गई है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बिना समुचित भौगोलिक सत्यापन के वार्ड और बूथों का पुनर्गठन किया गया, जिसके कारण एक ही बूथ के मतदाता अलग-अलग स्थानों में बंट गए हैं।

कांग्रेस का कहना है कि इससे खासकर बुजुर्ग मतदाताओं और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

केपीसीसी प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि सुनवाई के नाम पर मतदाताओं को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि केवल लिपिकीय या सॉफ्टवेयर से जुड़ी त्रुटियों के कारण मतदाताओं को सुनवाई के लिए न बुलाया जाए।

उन्होंने यह भी जोर दिया कि जिन मतदाताओं ने वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं, उन्हें केवल इस आधार पर सुनवाई के लिए न बुलाया जाए कि उनका नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है।

प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से तथाकथित “अवैज्ञानिक बूथ परिसीमन” को तुरंत दुरुस्त करने की मांग की, ताकि आगे की जटिलताओं से बचा जा सके।

मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मिलान में गड़बड़ी और विसंगतियों के कारण करीब 18 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। उनका तर्क था कि सॉफ्टवेयर की खामियों या निर्वाचन अधिकारियों की प्रशासनिक चूक के लिए मतदाताओं को दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

केपीसीसी ने राज्य भर में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और कार्यप्रणाली में एकरूपता लाने की भी मांग की और हर स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it