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2008 बेंगलुरु बम धमाका मामले में संदिग्ध आतंकी आरोपी की दिल का दौरा पड़ने से मौत

बेंगलुरु के 2008 मडीवाला बम धमाके मामले में संदिग्ध आतंकी आरोपी की शुक्रवार को अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने से पहले ही दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।

2008 बेंगलुरु बम धमाका मामले में संदिग्ध आतंकी आरोपी की दिल का दौरा पड़ने से मौत
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बेंगलुरु। बेंगलुरु के 2008 मडीवाला बम धमाके मामले में संदिग्ध आतंकी आरोपी की शुक्रवार को अदालत द्वारा फैसला सुनाए जाने से पहले ही दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।

गौरतलब है कि 2008 बेंगलुरु में हुए सिलसिलेवार बम धमाके ने शहर को हिलाकर रख दिया था। इनमें होसुर रोड स्थित मडीवाला पुलिस चेकपोस्ट बस स्टैंड पर हुआ घातक विस्फोट भी शामिल है।

इन हमलों में मडीवाला बस स्टॉप पर एक महिला समेत दो लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।

मृतक, संदिग्ध आतंकी 60 वर्षीय अब्दुल खादर, विस्फोट मामले के सिलसिले में 2010 से बेंगलुरु के परप्पना अग्रहारा केंद्रीय जेल में न्यायिक हिरासत में था।

जेल अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार को खादर की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए जयदेव अस्पताल ले जाया गया।

हालांकि, खबरों के मुताबिक अस्पताल ले जाते समय उन्हें दिल का दौरा पड़ा और इलाज मिलने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई।

जेल अधिकारियों ने बताया कि खादर ने स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत की थी, जिसके चलते अधिकारियों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

उनकी मृत्यु के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए विक्टोरिया अस्पताल भेजा गया। उनके परिवार को घटना की जानकारी दे दी गई है।

खादर के खिलाफ मुकदमा अंतिम चरण में था और अदालत से अगले कुछ दिनों में फैसला सुनाए जाने की उम्मीद थी। हालांकि, अदालत का फैसला सुनाए जाने से पहले ही आरोपी का निधन हो गया।

मडिकेरी जिले के विराजपेट निवासी अब्दुल खादर पर बेंगलुरु में 2008 के सिलसिलेवार बम धमाकों के सिलसिले में आरोप थे। उन्हें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने विस्फोटों की जांच के तहत गिरफ्तार किया था।

मडीवाला विस्फोट 2008 में बेंगलुरु में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में से एक था, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक जांच शुरू की थी।

25 जुलाई 2008 को, 30 मिनट के अंतराल में कई देसी टाइमर डिवाइस फट गए। इनमें से एक प्रमुख स्थान मडीवाला चेकपोस्ट था, और घायलों का इलाज पास के सेंट जॉन अस्पताल में किया गया।

जांचकर्ताओं ने पाया कि ये बम धमाके कथित तौर पर प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन एसआईएमआई (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) और लश्कर-ए-तैबा (एलईटीटी) द्वारा रचे गए थे।

कर्नाटक पुलिस और एनआईए ने कई एफआईआर दर्ज कीं और वर्षों में दर्जनों संदिग्धों को गिरफ्तार किया।

पाकिस्तान में कथित संचालकों सहित कई प्रमुख व्यक्तियों की पहचान की गई।


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