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कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया को खत्म किया जाए: सीएम शिवकुमार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य में मतदाता सूचियों की चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को खत्म करने की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया के कारण वास्तविक मतदाता, खासकर गरीब और वंचित वर्ग के लोग, मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।

कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया को खत्म किया जाए: सीएम शिवकुमार
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बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को राज्य में मतदाता सूचियों की चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को खत्म करने की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि इस प्रक्रिया के कारण वास्तविक मतदाता, खासकर गरीब और वंचित वर्ग के लोग, मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।

एक बयान में शिवकुमार ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया ने अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के तरीके को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं।

उन्होंने कहा, "कर्नाटक में ऐसी प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए, जिससे वास्तविक मतदाता चुनावी प्रक्रिया से बाहर हो जाएं, खासकर गरीब और वंचित वर्ग के लोग।"

उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए हर नागरिक के मतदान के अधिकार की सुरक्षा जरूरी है।

शिवकुमार ने मांग की कि मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया को खत्म किया जाए और मतदाता डेटा का नए सिरे से व्यापक पुनरीक्षण कराया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा, "वोट देने का अधिकार जीने का अधिकार है।" उन्होंने चुनाव आयोग से इस मौलिक अधिकार की रक्षा करने की अपील की। साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की।

बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए शिवकुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की अपनी मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए आवाज उठाई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि आम नागरिकों के वोट देने के अधिकार का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग करने की कोशिश की जा रही है।

शिवकुमार ने कहा, "पश्चिम बंगाल, बिहार और कई अन्य राज्यों में भी इसी तरह की कोशिशें की गई हैं। अब कर्नाटक समेत हर जगह ऐसा करने की कोशिश हो रही है। मैंने कल चुनाव आयोग से और समय देने की मांग भी की थी।"

चुनाव आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने दावा किया कि चुनाव आयोग को दी गई स्वायत्तता का दुरुपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, "जब अधिकतर सदस्य किसी राय से सहमत नहीं हैं, तो एकतरफा फैसला नहीं थोपा जा सकता। बेहतर होगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त नैतिक आधार पर स्वेच्छा से इस्तीफा दे दें।"

शिवकुमार ने कहा कि यह मामला कांग्रेस या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वोटों का नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार का है।

उन्होंने कहा, "उस अधिकार को कोई नहीं दबा सकता।"

मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6, 7 और 8 का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने मौजूदा प्रक्रिया के तरीके पर सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि इससे खासतौर पर अशिक्षित और समाज के वंचित वर्गों के लोग प्रभावित हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, "यह केवल किसी की राय का मामला नहीं है। यह मौलिक अधिकार है। यह आम आदमी की आवाज है।"

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर संसद समेत बड़े मंच पर चर्चा होनी चाहिए।

शिवकुमार ने चुनाव आयोग के नाम पर अलग-अलग राज्यों में अधिकारियों पर किसी भी तरह के कथित दबाव या उन्हें डराने-धमकाने का भी विरोध किया।

उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि नए सिरे से एसआईआर कराया जाए। सभी को उनका अधिकार मिलना चाहिए। हर वोट के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए पूरी स्थिति की व्यापक समीक्षा होनी चाहिए और मतदाता डेटा की फिर से जांच की जानी चाहिए।"


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