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महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने के लिए राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करें : बोम्मई

पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद बसवराज बोम्मई ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे अपने मतभेदों को दूर कर महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करें। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अल्पसंख्यक समुदायों के बीच कांग्रेस के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है

महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने के लिए राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करें : बोम्मई
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बेंगलुरु। पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद बसवराज बोम्मई ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे अपने मतभेदों को दूर कर महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करें। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अल्पसंख्यक समुदायों के बीच कांग्रेस के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है।

बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए बोम्मई ने सभी दलों से अपील की कि वे भारत के लोकतांत्रिक भविष्य के हित में एक साथ आएं और महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करें।

उन्होंने कहा कि जल्द ही लोकसभा का विशेष सत्र होने वाला है और उन्हें खुशी है कि संसद महिला आरक्षण और परिसीमन पर एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी चर्चा करने जा रही है। आंबेडकर ने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं के लिए प्रावधान किए थे।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच भी इसी तरह की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी इस तरह के कदम का समर्थन किया था। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने 2008 में महिला आरक्षण विधेयक (108वां संशोधन विधेयक) पेश किया था, जिसे 2010 में राज्यसभा में पारित किया गया था।

उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं को आरक्षण देना एक साझा आकांक्षा है और विपक्षी दलों से इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की।

सरकारी नौकरियों के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर केस दर्ज होने के सवाल पर बोम्मई ने कहा कि पिछले एक साल से सरकारी नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं और अब ये प्रदर्शन बढ़ रहे हैं। उन्होंने कर्नाटक सरकार पर युवाओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया और कहा कि मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने एक महीने में नोटिफिकेशन जारी करने का आश्वासन दिया था, जो पूरा नहीं हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दे रही है और इसे 'संविधान विरोधी' बताया। उन्होंने कहा कि सरकार संवैधानिक मूल्यों और जनता के हितों के खिलाफ काम कर रही है और चेतावनी दी कि भले ही अभी पुलिस कार्रवाई से प्रदर्शन दबाए जा रहे हों, लेकिन भविष्य में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

राज्य कांग्रेस के भीतर अल्पसंख्यक नेताओं से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने कहा कि यह केवल नेतृत्व का मामला नहीं है, बल्कि अल्पसंख्यक समुदायों में व्यापक असंतोष का संकेत है। उन्होंने दावा किया कि जो समुदाय पहले कांग्रेस के वोट बैंक माने जाते थे, वे अब उससे नाराज हो रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय भी कांग्रेस से भरोसा खो रहे हैं और भविष्य में इसका कड़ा विरोध कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एएचआईएनडीए के बैनर तले शासन चलाने के बावजूद कई समुदाय अब खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कांग्रेस विधायकों के दिल्ली जाने की खबरों पर कहा कि यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों और विधायकों पर नियंत्रण खो चुके हैं। सिद्दारमैया एक अनुभवी नेता होने के बावजूद अपने ही खेमे में असंतोष का सामना कर रहे हैं और विधायक स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं। यह अटकलें भी हैं कि मुख्यमंत्री स्वयं इन घटनाओं के पीछे हो सकते हैं।


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