NLSIU में उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग टली, CJI सूर्य कांत के विरोध के बाद फिर गरमाया कैंपस
LawSoc के मुताबिक, डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग का आयोजन 13 सितंबर को मनाए जाने वाले ‘पॉलिटिकल प्रिजनर्स डे’ के संदर्भ में किया जाना था। आयोजकों का उद्देश्य केवल डॉक्यूमेंट्री दिखाना नहीं, बल्कि इससे जुड़े व्यापक कानूनी सवालों पर चर्चा करना भी था।

बेंगलुरु: नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) एक बार फिर कैंपस में होने वाले कार्यक्रम को लेकर चर्चा में है। यूनिवर्सिटी की लॉ एंड सोसाइटी कमिटी (LawSoc) ने जेल में बंद उमर खालिद पर बनी डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तावित स्क्रीनिंग फिलहाल टाल दी है। ‘Prisoner No. 626710 is Present’ नाम की इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग सोमवार, 14 सितंबर को होनी थी। इसके बाद छात्रों के बीच इससे जुड़े कानूनी और संवैधानिक मुद्दों पर चर्चा का कार्यक्रम भी प्रस्तावित था।
लॉजिस्टिक और सुरक्षा कारणों का दिया हवाला
LawSoc ने छात्रों को ई-मेल के जरिए स्क्रीनिंग स्थगित किए जाने की जानकारी दी। कमिटी ने इसके लिए लॉजिस्टिकल और सुरक्षा संबंधी कारणों का हवाला दिया है। हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम पूरी तरह रद्द नहीं हुआ है और इसी ट्राइमेस्टर में किसी नई तारीख पर आयोजित किया जाएगा। कमिटी ने यह भी कहा कि कार्यक्रम को किसी बाहरी दबाव के कारण नहीं टाला गया है। उसका कहना है कि आयोजन को सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से कराने के लिए जरूरी व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है। साथ ही छात्रों की सुरक्षा और भलाई से समझौता नहीं करने की बात कही गई है।
ABVP ने किया था कार्यक्रम का विरोध
LawSoc के मुताबिक, डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग का आयोजन 13 सितंबर को मनाए जाने वाले ‘पॉलिटिकल प्रिजनर्स डे’ के संदर्भ में किया जाना था। आयोजकों का उद्देश्य केवल डॉक्यूमेंट्री दिखाना नहीं, बल्कि इससे जुड़े व्यापक कानूनी सवालों पर चर्चा करना भी था। इनमें ट्रायल से पहले हिरासत, जमानत, असहमति, राजनीतिक कैद और आपराधिक कानून तथा लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के बीच संबंध जैसे मुद्दे शामिल थे। आयोजकों के अनुसार, सितंबर में उमर खालिद की जेल में सजा के छह साल पूरे हो रहे हैं। हालांकि, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस कार्यक्रम का विरोध किया। संगठन ने NLSIU के वाइस चांसलर को पत्र लिखकर मांग की कि यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक परिसर का इस्तेमाल राजनीतिक या वैचारिक प्रचार के लिए नहीं होना चाहिए। ABVP ने स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं देने और कैंपस को राजनीतिक ध्रुवीकरण से बचाने की अपील की।
CJI सूर्य कांत को लेकर भी हुआ था विवाद
NLSIU में यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब कुछ समय पहले यूनिवर्सिटी का दीक्षांत समारोह भी विरोध के कारण चर्चा में रहा था। छात्रों, पूर्व छात्रों और ग्रेजुएट होने वाले विद्यार्थियों के एक समूह ने CJI सूर्य कांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को समारोह में आमंत्रित किए जाने पर आपत्ति जताई थी।
विरोध के बीच 12 सितंबर को प्रस्तावित 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को आगे बढ़ाकर 17 अक्टूबर कर दिया गया। यूनिवर्सिटी ने छात्रों से यह विकल्प भी मांगा कि वे समारोह में व्यक्तिगत रूप से डिग्री लेना चाहते हैं या अनुपस्थित रहकर डिग्री प्राप्त करना चाहते हैं।
NALSAR विवाद से भी जुड़ा है मामला
इससे पहले हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में भी CJI सूर्य कांत को दीक्षांत समारोह में बुलाए जाने को लेकर छात्रों ने विरोध जताया था। यह विरोध NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शनों और उस दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर CJI की टिप्पणियों के संदर्भ में सामने आया था। NALSAR विवाद के बाद BCI की ओर से पासआउट छात्रों के एनरोलमेंट को लेकर उठाए गए कदम ने भी विवाद खड़ा किया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद BCI ने अपना फैसला वापस ले लिया। NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों के एक समूह ने भी BCI की कार्रवाई पर आपत्ति जताई थी। ऐसे में उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग स्थगित होने से NLSIU में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अकादमिक स्वायत्तता और कैंपस की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।


