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कर्नाटक: पुलिस ने स्टिंग ऑपरेशन मामले में सिद्धारमैया को क्लीन चिट दी

सेंट्रल क्राइम ब्रांच (सीसीबी) की साइबर क्राइम पुलिस ने कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमिटी (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य सिद्धारमैया को क्लीन चिट दे दी है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में लगाए गए आरोप बनावटी (फर्जी) लगते हैं।

कर्नाटक: पुलिस ने स्टिंग ऑपरेशन मामले में सिद्धारमैया को क्लीन चिट दी
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बेंगलुरु। सेंट्रल क्राइम ब्रांच (सीसीबी) की साइबर क्राइम पुलिस ने कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमिटी (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य सिद्धारमैया को क्लीन चिट दे दी है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में लगाए गए आरोप बनावटी (फर्जी) लगते हैं।

बेंगलुरु सिटी पुलिस की विशेष शाखा ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित स्टिंग वीडियो में यौन शोषण के जो आरोप लगाए गए हैं, वे किसी मनगढ़ंत और जानबूझकर रची गई कहानी का हिस्सा लगते हैं। पुलिस ने आगे कहा कि जांच में कुछ ऐसे सुराग मिले हैं जिनसे पता चलता है कि कर्नाटक में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की छवि खराब करने के लिए एक सुनियोजित साजिश रची गई हो सकती है।

क्राइम नंबर 56/2026 की जांच की प्रगति पर जारी बयान में पुलिस ने कहा कि अब तक दर्ज किए गए बयानों और जुटाए गए सबूतों से इस बात की पुष्टि नहीं होती कि वीडियो में दिखाई गई घटना वास्तव में उस तरह से घटी है।

वीडियो में दिखने वाले सभी लोगों की पहचान कर ली गई है और उनसे विस्तार से पूछताछ की गई है; कुछ लोगों से तो कई बार पूछताछ की गई है। पुलिस ने कहा कि रिकॉर्डिंग में जिन लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं या संकेत दिए गए हैं, वे प्रथम दृष्टया झूठे और मनगढ़ंत लगते हैं। मामले की आगे की जांच जारी है।

जिस मोबाइल फोन से कथित तौर पर यह वीडियो रिकॉर्ड किया गया था, उसे खोज निकाला गया है और जब्त कर लिया गया है। रिकॉर्डिंग की प्रमाणिकता और सत्यता की जांच के लिए इसे फॉरेंसिक लैब भेजा गया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है।

पुलिस के अनुसार, यह वीडियो कथित तौर पर 2023 में रिकॉर्ड किया गया था, जबकि इसमें जिस घटना का जिक्र है, वह 2011 की बताई जा रही है। जांचकर्ता इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि घटना के लगभग 12 साल बाद इसे क्यों रिकॉर्ड किया गया और क्या इसे जानबूझकर किसी गलत कहानी को गढ़ने या अपने निजी स्वार्थों को साधने के लिए तैयार या हेरफेर करके बनाया गया था।

जांच में यह सामने आया है कि सितंबर और अक्टूबर 2026 के दौरान इस वीडियो को यूट्यूब और एक्स (एक्स) सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, वीडियो को अपलोड करने के लिए अज्ञात अकाउंट्स का इस्तेमाल किया गया था। इसके लिए डिजिटल पहचान छिपाने की उन्नत तकनीकों का सहारा लिया गया, जिसमें वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन), मास्क किए गए आईपी एड्रेस, वर्चुअल या फर्जी फोन नंबर और अन्य तरीकों का उपयोग शामिल है। जांच में कर्नाटक के बाहर के स्थानों से जुड़े डिजिटल निशान भी मिले हैं।

तकनीकी विश्लेषण और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच के जरिए, जांचकर्ताओं ने यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करने में इस्तेमाल हुए मोबाइल फोन का पता लगाया। यह फोन दिल्ली की एक ऐसी दुकान से जुड़ा है, जो पुराने और रिफर्बिश्ड (मरम्मत किए गए) डिवाइस बेचती है। इस डिवाइस को हासिल करने वाले लोगों की भी पहचान कर ली गई है। मोबाइल फोन हासिल करने से जुड़े आरोपियों में से एक को 24 अक्टूबर, 2026 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए गिरफ्तार किया गया।

आरोपी से विस्तार से पूछताछ की गई, जिससे कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। शुरुआती जांच से पता चलता है कि वह एक फ्रीलांस सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम कर रहा है और नई दिल्ली में रहने वाले कुछ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों से उसके संबंध हो सकते हैं। इन कथित संबंधों की प्रकृति और दायरे, तथा इस मामले से इनके संबंध की जांच की जा रही है।

पुलिस ने बताया कि जांच में ऐसे सुराग मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि वीडियो का प्रसार एक सोची-समझी कोशिश हो सकती है। इसका मकसद कर्नाटक में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की छवि खराब करना, जनता की राय को प्रभावित करना, और राजनीतिक विवाद तथा सार्वजनिक असंतोष पैदा करना हो सकता है।

जांचकर्ता इस संभावना की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इस वीडियो को गलत इरादे से तैयार करने, उसे आगे बढ़ाने, अपलोड करने या फैलाने में कई लोगों ने मिलकर काम किया है।

आगे की पूछताछ के लिए कुछ लोगों की पहचान की गई है और उन्हें कानून के अनुसार नोटिस जारी किए गए हैं। पुलिस ने अभी उनके नाम उजागर नहीं किए हैं, ताकि जांच की निष्पक्षता बनी रहे, सबूतों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो और आगे की कानूनी कार्यवाही प्रभावित न हो।

पुलिस ने आम जनता, मीडिया संगठनों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की है। उनसे कहा गया है कि वे बिना पुष्टि किए गए आरोपों को न फैलाएं और न ही जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालें, क्योंकि इससे जनता गुमराह हो सकती है या चल रही जांच पर असर पड़ सकता है।

बेंगलुरु सिटी पुलिस ने कहा कि वे सच्चाई सामने लाने, किसी भी आपराधिक कृत्य के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आगे की जांच जारी है।


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