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कर्नाटक: मंत्री कुमारस्वामी ने नदी-जोड़ो परियोजना पर सहमति को लेकर सीएम डीके शिवकुमार से किया सवाल

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की आलोचना की। शिवकुमार ने कहा था कि कर्नाटक ने कृष्णा, गोदावरी और कावेरी नदियों को आपस में जोड़ने की प्रस्तावित परियोजना के लिए अपनी सहमति दे दी है।

कर्नाटक: मंत्री कुमारस्वामी ने नदी-जोड़ो परियोजना पर सहमति को लेकर सीएम डीके शिवकुमार से किया सवाल
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बेंगलुरु। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की आलोचना की। शिवकुमार ने कहा था कि कर्नाटक ने कृष्णा, गोदावरी और कावेरी नदियों को आपस में जोड़ने की प्रस्तावित परियोजना के लिए अपनी सहमति दे दी है।

कुमारस्वामी ने सवाल उठाया कि राज्य पानी में अपना हिस्सा तय होने से पहले ही ऐसी परियोजना के लिए कैसे सहमत हो सकता है।

बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कर्नाटक के सिंचाई हितों से जुड़े बेहद अहम मामले पर गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहे हैं।

कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें सैद्धांतिक रूप में नदियों को जोड़ने से कोई आपत्ति नहीं है। इस परियोजना को निश्चित रूप से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की सहमति देने से पहले सरकार को यह पता लगाना चाहिए कि परियोजना के तहत राज्य को कितना पानी आवंटित किया गया है।

उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री को कर्नाटक के सिंचाई मुद्दों की पर्याप्त जानकारी नहीं है और उन्होंने तथ्यों को समझे बिना ही बयान दिए हैं।

कुमारस्वामी ने शिवकुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि नदियों को जोड़ने और पानी के बंटवारे के मामलों को वैसे नहीं निपटाया जा सकता जैसे बेंगलुरु में रियल एस्टेट का कारोबार किया जाता है।

उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री तकनीकी बारीकियों से अनजान थे, तो सार्वजनिक बयान देने से पहले उन्हें सिंचाई विशेषज्ञों, इंजीनियरों या कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करने वाली कानूनी टीम से सलाह लेनी चाहिए थी।

बेलगावी में मुख्यमंत्री की हालिया टिप्पणी का जिक्र करते हुए कुमारस्वामी ने इस बयान के आधार पर स्पष्टीकरण की मांग की।

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक के जल संसाधनों से जुड़े मामलों में मुख्यमंत्री 'बहुत ज्‍यादा उदार' हो गए हैं। तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा तुंगभद्रा जलाशय के क्रेस्ट गेट्स के हालिया उद्घाटन का जिक्र करते हुए कुमारस्वामी ने सवाल किया कि कर्नाटक पैसा क्यों खर्च कर रहा है, जबकि पड़ोसी राज्यों को पानी से फायदा होगा।

उन्होंने विपक्ष या कर्नाटक की जनता को बताए बिना तुंगभद्रा जलाशय से गाद हटाने (डिसिल्टिंग) के बारे में पड़ोसी राज्यों के साथ चर्चा करने की बात कहने के लिए भी मुख्यमंत्री की आलोचना की।

उन्होंने मुख्यमंत्री के उस कथित दावे पर भी आपत्ति जताई कि केंद्र सरकार नदी-जोड़ो परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करेगी। कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें नदी-जोड़ो परियोजना से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार को पहले कर्नाटक को यह बताना होगा कि राज्य को असल में कितना पानी मिलेगा।

कुमारस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री को पहले नदी-जोड़ो प्रस्ताव के इतिहास और मौजूदा स्थिति को समझना चाहिए।

उनके मुताबिक, 2023 में तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में कृष्णा-गोदावरी-कावेरी नदी-जोड़ो परियोजना के तहत 247 टीएमसी पानी के इस्तेमाल की योजना थी। उन्होंने दावा किया कि उस प्रस्ताव के तहत आंध्र प्रदेश को 90 टीएमसी पानी मिलना था, जबकि तेलंगाना और तमिलनाडु को 60-60 टीएमसी पानी आवंटित किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में कर्नाटक को कोई पानी आवंटित नहीं किया गया था।

उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की लगातार कोशिशों के बाद, कर्नाटक को बाद में मलाप्रभा नदी से 15 टीएमसी पानी आवंटित किया गया, लेकिन शर्त यह थी कि इसका इस्तेमाल सिर्फ पीने के पानी के लिए किया जाएगा।

कुमारस्वामी ने पूछा कि मुख्यमंत्री यह दावा कैसे कर सकते हैं कि कर्नाटक इस परियोजना का समर्थन करता है और 1 लाख करोड़ रुपये निवेश करने को तैयार है, और उन्होंने किस आधार पर यह बयान दिया है।

केंद्रीय मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या कर्नाटक की सहमति की घोषणा से पहले केंद्रीय जल आयोग या राष्ट्रीय जल बोर्ड ने इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी।


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