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कर्नाटक: विभागों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस में असंतोष बरकरार, कई नेता मंत्री पद की दौड़ में

कर्नाटक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई कांग्रेस सरकार में मंत्रिमंडल के विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष थमता नजर नहीं आ रहा है

कर्नाटक: विभागों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस में असंतोष बरकरार, कई नेता मंत्री पद की दौड़ में
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बेंगलुरु। कर्नाटक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई कांग्रेस सरकार में मंत्रिमंडल के विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष थमता नजर नहीं आ रहा है। बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा अब तक अपने विभाग का कार्यभार नहीं संभाल पाए हैं, जिससे पार्टी के भीतर नाराजगी की चर्चा तेज हो गई है।

कांग्रेस नेतृत्व ने वरिष्ठ मंत्री रामलिंगा रेड्डी और के.एच. मुनियप्पा की नाराजगी को फिलहाल शांत कर दिया है, लेकिन विभागों के आवंटन को लेकर असंतोष अभी भी बना हुआ है। रामलिंगा रेड्डी ने कथित तौर पर बेंगलुरु विकास विभाग की मांग करते हुए इस्तीफा सौंप दिया था, जिसे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद वापस ले लिया गया।

वहीं खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के.एच. मुनियप्पा ने भी अपने मंत्रालय का कार्यभार संभालने से इनकार करते हुए कहा था कि पार्टी नेतृत्व उनकी वरिष्ठता के अनुरूप बेहतर विभाग देने पर विचार करेगा।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने संकेत दिया है कि वह अगले सप्ताह नई दिल्ली जाकर पार्टी आलाकमान से कैबिनेट विस्तार और अन्य संबंधित मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

इधर, राज्यभर में पूर्व मंत्री जमीर अहमद खान और वरिष्ठ कांग्रेस विधायक हम्पनगौड़ा बदरली को मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग को लेकर समर्थकों के प्रदर्शन और पदयात्राएं जारी हैं।

कृष्णा बायरे गौड़ा ने शनिवार को बेंगलुरु में कहा कि किसी भी जिम्मेदारी के साथ स्पष्ट अधिकार होना जरूरी है, तभी प्रभावी ढंग से काम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री से चर्चा की है और उन्हें आश्वासन मिला है कि जल्द समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के फैसले के बाद ही वह आगे की रणनीति तय करेंगे।

बताया जा रहा है कि कृष्णा बायरे गौड़ा ने तीन दिन नई दिल्ली में रहकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और अपनी नाराजगी से अवगत कराया। सरकारी वाहन आवंटित होने के बावजूद वह अब भी अपनी निजी कार का उपयोग कर रहे हैं, जिसे पार्टी के अंदरूनी सूत्र उनका मौन विरोध मान रहे हैं।

दरअसल, उन्हें मिले बेंगलुरु विकास विभाग में बेंगलुरु डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीडीए) और बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीएमआरडीए) शामिल नहीं हैं। ये दोनों महत्वपूर्ण एजेंसियां मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने अपने पास रखी हैं, जिस पर गौड़ा ने आपत्ति जताई है।

इस बीच, हुबली में जमीर अहमद खान के समर्थकों ने धार्मिक गुरुओं के नेतृत्व में प्रदर्शन कर उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाने की मांग उठाई। वहीं, पांच बार के कांग्रेस विधायक हम्पनगौड़ा बदरली के समर्थकों ने सिंधनूर से अंबा देवी मंदिर तक 20 किलोमीटर की पदयात्रा निकालकर उनके लिए मंत्री पद की मांग की और विशेष पूजा-अर्चना भी की।

हालांकि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री यू.टी. खादर ने पार्टी में किसी भी तरह की नाराजगी की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि समर्थकों द्वारा अपने नेताओं के लिए पद की मांग करना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि किसे जिम्मेदारी देनी है, इसका फैसला पार्टी आलाकमान करेगा और कांग्रेस सरकार प्रभावी ढंग से शासन सुनिश्चित करेगी।

उधर, पूर्व मंत्री के.एन. राजन्ना के पुत्र और कांग्रेस एमएलसी राजेंद्र राजन्ना ने भी मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात उन्हें सरकार में कोई जिम्मेदारी दिलाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।


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