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कर्नाटक के विज्ञान केंद्रों में छात्रों और इसरो वैज्ञानिकों की सीधी बातचीत कराने की पहल, मंत्री ने इसरो से मांगा सहयोग

कर्नाटक के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अजय धरम सिंह ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से राज्य के विज्ञान केंद्रों में छात्रों और वैज्ञानिकों के बीच सीधे संवाद कार्यक्रम आयोजित करने में सहयोग मांगा है। इस पहल का उद्देश्य विज्ञान की पढ़ाई को किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यावहारिक और अनुभव आधारित बनाना है।

कर्नाटक के विज्ञान केंद्रों में छात्रों और इसरो वैज्ञानिकों की सीधी बातचीत कराने की पहल, मंत्री ने इसरो से मांगा सहयोग
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बेंगलुरु। कर्नाटक के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अजय धरम सिंह ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से राज्य के विज्ञान केंद्रों में छात्रों और वैज्ञानिकों के बीच सीधे संवाद कार्यक्रम आयोजित करने में सहयोग मांगा है। इस पहल का उद्देश्य विज्ञान की पढ़ाई को किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यावहारिक और अनुभव आधारित बनाना है।

मंत्री ने इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन से मुलाकात के दौरान यह प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के जरिए छात्र अंतरिक्ष विज्ञान, अनुसंधान, उपग्रह तकनीक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में करियर की संभावनाओं के बारे में सीधे इसरो के वैज्ञानिकों से जानकारी हासिल कर सकेंगे।

अजय धरम सिंह ने कहा कि जब छात्रों को वैज्ञानिकों से सीधे बातचीत का अवसर मिलता है, तो विज्ञान केवल पाठ्यपुस्तक का विषय नहीं रह जाता, बल्कि भविष्य के अवसर के रूप में दिखाई देता है। इसरो वैज्ञानिकों के अनुभव और उपलब्धियां छात्रों में जिज्ञासा, शोध की सोच और बड़े लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा जगाती हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार छात्रों के बीच विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए विज्ञान केंद्रों, मोबाइल डिजिटल प्लैनेटोरियम और दूरबीन आधारित शिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार कर रही है।

मंत्री के अनुसार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का मोबाइल डिजिटल प्लैनेटोरियम कार्यक्रम अब तक राज्य के 3,282 स्कूलों तक पहुंच चुका है और इससे 5.46 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं और शिक्षक लाभान्वित हुए हैं।

इसके अलावा, प्रोवाइडिंग एक्सेस टू टेलीस्कोप्स (पीएटी) कार्यक्रम के तहत कर्नाटक आवासीय शैक्षणिक संस्थान के स्कूलों और कॉलेजों को दूरबीन उपलब्ध कराई गई हैं तथा विज्ञान शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया गया है।

उन्होंने कहा कि अगला कदम विज्ञान केंद्रों में इसरो वैज्ञानिक-छात्र संवाद कार्यक्रम शुरू करना है, ताकि अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी को छात्रों के लिए अधिक रोचक और सुलभ बनाया जा सके।

मंत्री ने कहा कि विज्ञान को केवल पढ़ाया नहीं, बल्कि दिखाया, समझाया और सवालों के जरिए अनुभव कराया जाना चाहिए। वैज्ञानिकों के साथ सीधा संवाद छात्रों में वैज्ञानिक सोच को मजबूत करेगा और भविष्य के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं तथा तकनीकी विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार करने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा कि इसरो के सहयोग से राज्य सरकार इन संवाद कार्यक्रमों को कर्नाटक के सभी विज्ञान केंद्रों तक पहुंचाना चाहती है, ताकि शहरों के साथ-साथ जिलों और तालुकों के छात्र भी वैज्ञानिकों से सीधे जुड़ सकें।


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