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मैसूरु में अवैध हाथीदांत तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 4 किलो से अधिक आइवरी बरामद

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की नागपुर क्षेत्रीय इकाई ने मुंबई जोनल यूनिट के तहत कार्रवाई करते हुए कर्नाटक के मैसूरु में सक्रिय एक बड़े अवैध वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है।

मैसूरु में अवैध हाथीदांत तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, 4 किलो से अधिक आइवरी बरामद
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मैसूरु। राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की नागपुर क्षेत्रीय इकाई ने मुंबई जोनल यूनिट के तहत कार्रवाई करते हुए कर्नाटक के मैसूरु में सक्रिय एक बड़े अवैध वन्यजीव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है।

26 मई 2026 को की गई इस कार्रवाई में 4.058 किलोग्राम भारतीय हाथी के दांत (आइवरी) जब्त किए गए और अवैध कारोबार में शामिल तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।

डीआरआई को मिली विशेष खुफिया जानकारी के आधार पर टीम ने छापेमारी की और आरोपियों को संरक्षित वन्यजीव उत्पादों की खरीद-फरोख्त करते हुए पकड़ा।

बरामद आइवरी भारतीय हाथियों के दांतों से संबंधित है, जिसका व्यापार भारतीय कानून के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। भारतीय हाथी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अनुसूची-1 में रखा गया है। इस श्रेणी में आने वाले जानवरों के शिकार, व्यापार या उनके अंगों को रखने पर पूर्ण प्रतिबंध है।

डीआरआई अधिकारियों ने मौके पर जब्ती की सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद गिरफ्तार तीनों आरोपियों और बरामद 4.058 किलोग्राम हाथीदांत को मैसूरु टेरिटोरियल रेंज के वन क्षेत्राधिकारी को सौंप दिया। अब वन विभाग वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई करेगा।

यह मामला भारत में वन्यजीव अपराध की गंभीर चुनौती को उजागर करता है, जहां संगठित गिरोह मुनाफे के लिए संकटग्रस्त प्रजातियों को निशाना बना रहे हैं।

एशियाई हाथीदांत की अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में काफी मांग है। इसकी अपेक्षाकृत मुलायम बनावट के कारण कारीगर इसे बारीक नक्काशी और सजावटी वस्तुएं बनाने के लिए पसंद करते हैं। ऐसे उत्पाद अवैध अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊंची कीमतों पर बेचे जाते हैं और इन्हें विलासिता व प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है।

हालांकि एशियाई हाथीदांत के व्यापार पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं, फिर भी तस्करी का नेटवर्क गुप्त मांग के कारण सक्रिय बना हुआ है।

अधिकारियों ने बताया कि संगठित तस्करी गिरोहों की संलिप्तता के कारण ऐसे मामलों की जांच जटिल हो जाती है और इसके लिए डीआरआई तथा राज्य वन विभागों के बीच समन्वित प्रयास जरूरी होते हैं।

डीआरआई ने हाल के वर्षों में कई ऐसे तस्करी नेटवर्क ध्वस्त किए हैं। अधिकारियों ने कहा कि भारत की जैव विविधता की रक्षा और पर्यावरण अपराधों पर रोक लगाने के लिए सतर्कता और खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियान बेहद जरूरी हैं।

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए इसे समय पर उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका मानना है कि इससे अन्य संभावित तस्करों को भी कड़ा संदेश जाएगा।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि आवासीय क्षेत्रों के घटने और शिकार जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हाथियों के संरक्षण के लिए इस तरह की सख्त कार्रवाई भविष्य में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगी।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों में सक्रिय बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं।


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