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परिसीमन से दक्षिणी राज्यों को आर्थिक नुकसान होगा : डीके सुरेश

लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के प्रस्तावित परिसीमन से न केवल दक्षिणी राज्यों में सीटों की संख्या कम होगी

परिसीमन से दक्षिणी राज्यों को आर्थिक नुकसान होगा : डीके सुरेश
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बेंगलुरु। लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के प्रस्तावित परिसीमन से न केवल दक्षिणी राज्यों में सीटों की संख्या कम होगी, बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा। कांग्रेस के पूर्व सांसद डी.के. सुरेश ने मंगलवार को यह बात कही और आरोप लगाया कि दक्षिण से मिलने वाले कर राजस्व को उत्तरी राज्यों की ओर मोड़ दिया जाएगा।

यहां अपने घर पर पत्रकारों से बात करते हुए, बेंगलुरु शहरी, ग्रामीण और रामनगर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ लिमिटेड (बीएएमयूएल) के अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के छोटे भाई सुरेश ने कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा।

उन्होंने कहा, "दक्षिणी राज्यों को अब जाग जाना चाहिए। मैंने कहा था कि एक दिन यह चिंता जरूर उठेगी... वरना, लोग दूसरे रास्ते सोचने लगेंगे। सीटों का बढ़ना या घटना ही एकमात्र मुद्दा नहीं है।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का जिक्र करते हुए जिसमें उन्होंने कहा था कि परिसीमन की वजह से दक्षिणी राज्यों की सीटें कम नहीं होंगी, सुरेश ने असहमति जताई और दोहराया कि यह कदम इस क्षेत्र के लिए अन्यायपूर्ण होगा।

उन्होंने आरोप लगाया, "कुल मिलाकर, ऐसा लगता है कि यह दक्षिणी राज्यों से संसाधन उत्तरी राज्यों की ओर ले जाने की एक कोशिश है।"

उन्होंने परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना पर केंद्र सरकार की निर्भरता की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, "2011 की जनगणना के अनुसार, बेंगलुरु की आबादी लगभग 60-70 लाख थी, लेकिन अब यह बढ़कर लगभग 1.4 करोड़ हो गई है। कर्नाटक की आबादी लगभग 5 करोड़ से बढ़कर 7 करोड़ से ज्यादा हो गई है। इससे कई चुनौतियां खड़ी होंगी, जिनमें आर्थिक दबाव भी शामिल है। सभी पार्टियों को इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करना चाहिए।"

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के हालात पर सुरेश ने कहा कि देश कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक चुप्पी नहीं तोड़ी है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री कई मौकों पर नागरिकों को संबोधित करते हैं, लेकिन अब तक न तो उन्होंने और न ही किसी केंद्रीय मंत्री ने यह बताया है कि लोगों को मौजूदा हालात से कैसे निपटना चाहिए। प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर जिम्मेदारी लेनी चाहिए और अगले छह महीनों के लिए जरूरी मुद्दों और उपायों पर मार्गदर्शन देना चाहिए।"

उन्होंने आगे कहा कि मीडिया के जरिए सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश से नागरिकों के मन में शंकाएं पैदा होती हैं। उन्होंने कहा, "कीमतें बढ़ गई हैं, और चीजों की कमी की खबरें आ रही हैं। केंद्र सरकार को यह साफ करना चाहिए कि क्या यह कमी जान-बूझकर पैदा की गई है या इसके पीछे कोई और वजह है, और इस बारे में साफ-साफ सलाह जारी करनी चाहिए।"

गृह मंत्री जी. परमेश्वर के उस बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में, जिसमें उन्होंने कहा था कि सिद्धारमैया अगले दो साल तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे, सुरेश ने कहा, "आपको उनसे ही पूछना चाहिए। उन्होंने एक आधिकारिक बयान दिया है, और उसे वैसे ही समझा जाना चाहिए जैसा उन्होंने कहा है।"

अपने पहले के उस बयान के बारे में पूछे जाने पर, जिसमें उन्होंने अपने भाई को मुख्यमंत्री बनते देखने की इच्छा जाहिर की थी, सुरेश ने कहा, "हम इस बारे में बाद में बात कर सकते हैं। मैंने ऐसी कोई इच्छा होने से इनकार नहीं किया है, लेकिन मैंने यह भी नहीं कहा कि ऐसा तुरंत हो जाएगा।"

उप-चुनावों के बारे में उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस दोनों सीटें जीतेगी। उन्होंने कहा, "हमने गारंटी योजनाएं लागू की हैं और उन क्षेत्रों की विकास जरूरतों का अच्छी तरह से जवाब दिया है। कोई दिक्कत नहीं होगी।" और बागलकोट में हार की अटकलों को महज अंदाजा बताकर खारिज कर दिया।

राजनीतिक गतिविधियों में अपनी मौजूदगी के बारे में उन्होंने कहा कि वह लगातार सक्रिय बने हुए हैं। कैबिनेट में फेरबदल के बारे में उन्होंने कहा कि उप-चुनावों के बाद इस पर चर्चा होगी, और साथ ही यह भी जोड़ा कि उन्हें फिलहाल तमिलनाडु चुनावों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

तमिलनाडु पुलिसकर्मियों को दी गई मौत की सजा से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।


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