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सीबीआई को बड़ी कामयाबी, 20 साल से अधिक समय से फरार आरोपी को पकड़ा

सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने एक लंबे समय से फरार आरोपी को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है

सीबीआई को बड़ी कामयाबी, 20 साल से अधिक समय से फरार आरोपी को पकड़ा
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बेंगलुरु। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने एक लंबे समय से फरार आरोपी को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। सीबीआई ने गुरुवार को बेंगलुरु से कृष्णमूर्ति रघुनाथ नामक आरोपी को गिरफ्तार किया, जो कोलकाता के तीन बैंक धोखाधड़ी मामलों में 20 साल से अधिक समय से फरार था।

आरोपी पर 2005 से कानूनी कार्रवाई से बचने का आरोप है और वह लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा। कृष्णमूर्ति रघुनाथ उस समय भारत ओवरसीज बैंक लिमिटेड (अब इंडियन ओवरसीज बैंक) की बड़ाबाजार शाखा, कोलकाता में ब्रांच मैनेजर थे। सीबीआई की जांच के अनुसार, रघुनाथ ने अन्य लोगों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची। उन्होंने फर्जी फर्मों के नाम पर झूठे करंट अकाउंट खोले और बैंक के फंड का गबन किया। इस धोखाधड़ी से बैंक को लगभग 38.25 लाख रुपए का नुकसान हुआ। मामलों में बैंक धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और साजिश के आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई ने इन मामलों में पहले ही चार्जशीट दाखिल कर दी थी।

रघुनाथ 2005 से फरार चल रहा था और जांच एजेंसियों की पकड़ से बचने के लिए बार-बार अपना स्थान बदलता रहा। सीबीआई ने ह्यूमन इंटेलिजेंस (मानव सूचना) और टेक्निकल इनपुट के आधार पर एक हफ्ते तक चले विशेष ऑपरेशन में उसे बेंगलुरु से गिरफ्तार किया। यह ऑपरेशन पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और कर्नाटक के विभिन्न स्थानों पर चलाया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को बेंगलुरु की स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद उसे कोलकाता लाया जाएगा। 6 फरवरी 2026 को उसे कोलकाता की सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा।

सीबीआई के अनुसार, यह गिरफ्तारी बैंकिंग क्षेत्र में पुराने धोखाधड़ी मामलों पर लगाम कसने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। एजेंसी ने कहा कि फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं और कोई भी कितना भी समय क्यों न बिताए, कानून की गिरफ्त से बच नहीं सकता। इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है।

यह घटना बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को एक बार फिर उजागर करती है। 2005 का यह मामला पुराना होने के बावजूद सीबीआई की सतत निगरानी और तकनीकी खुफिया जानकारी के इस्तेमाल से सफलता मिली है।


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