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तुंगभद्रा बांध के सभी शिखर द्वार मई तक बदल दिए जाएंगे : कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री शिवकुमार

कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने विधान परिषद में बताया कि तुंगभद्रा बांध के सभी क्रेस्ट गेट (शिखर द्वार) इस साल मई तक बदल दिए जाएंगे।

तुंगभद्रा बांध के सभी शिखर द्वार मई तक बदल दिए जाएंगे : कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री शिवकुमार
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बेंगलुरु। कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को विधान परिषद में बताया कि तुंगभद्रा बांध के सभी क्रेस्ट गेट (शिखर द्वार) इस साल मई तक बदल दिए जाएंगे।

कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री और सिंचाई मंत्री डीके शिवकुमार ने विधान परिषद में कहा कि तुंगभद्रा बांध के सभी क्रेस्ट गेट बदल दिए जा रहे हैं। एक गेट बदलने में लगभग सात दिन लगते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 10 मार्च तक 14 गेट बदल दिए गए हैं और बाकी का काम तय समयानुसार पूरा कर लिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि अहमदाबाद स्थित हार्डवेयर टूल और मशीनरी प्रोजेक्ट कंपनी के साथ 10 जून 2025 को 15 महीने में 34.48 करोड़ रुपए की लागत पर सभी क्रेस्ट गेट बदलने का समझौता किया गया था। 25 गेट का निर्माण पूरा हो चुका है और दो गेट अभी निर्माणाधीन हैं। 14 गेट बदल दिए गए हैं और तीन गेटों का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि मई तक काम पूरा करने के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार नवली बैलेंसिंग रिजर्वायर पर चर्चा के लिए आगे नहीं आ रही है। कुछ लोगों ने वैकल्पिक योजना सुझाई है, लेकिन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चर्चा के लिए समय नहीं दे रहे। इस मामले पर अकेले निर्णय नहीं लिया जा सकता, इसे तीनों राइपेरियन राज्यों के साथ मिलकर तय करना होगा। उन्होंने कहा कि पानी वर्तमान में समुद्र में जा रहा है, जिसे राजनीतिक समर्थन मिलने पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

अगर कोई नदी एक से ज्यादा राज्यों से होकर गुजरती है, तो उस नदी के किनारे स्थित सभी राज्य राइपेरियन राज्य कहलाते हैं।

जब बीजेपी एमएलसी बीजी पाटिल ने भूमि मालिकों को मुआवजा न देने की खबर पर सवाल उठाया, तो डीके शिवकुमार ने कहा कि वे अधिकारियों से फाइलें लेकर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

विधान परिषद में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस सदस्य आरती कृष्णा ने बड़े बेंगलुरु प्राधिकरण के क्षेत्र में कई सार्वजनिक शौचालयों के उपयोग योग्य या नागरिक-अनुकूल न होने की चिंता जताई और उनकी सफाई की निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग का सुझाव दिया। शिवकुमार ने कहा कि 388 मौजूदा शौचालयों के साथ 441 नए शौचालय भी बनाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि शहर में कुल 380 सार्वजनिक शौचालय हैं। इनमें से 65 शौचालय सेवानिवृत्त नगर कर्मियों को सौंपे गए हैं, जबकि 20 शौचालय दिव्यांग व्यक्तियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। शुभ्र बेंगलुरु पहल के तहत 60 शौचालय बनाए जाएंगे और 191 शौचालय निर्माणाधीन हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार ने 13.5 करोड़ रुपए प्रदान किए हैं, जिससे 90 शौचालय बनाए जा रहे हैं। ब्रांड बेंगलुरु पहल के तहत 100 और शौचालय, मुख्य रूप से महिलाओं के लिए बनाए जा रहे हैं।

शिवकुमार ने कहा कि कुल मिलाकर 441 नए शौचालय 388 मौजूदा शौचालयों के साथ बनेंगे। यदि किसी विशेष स्थान पर शौचालय की जरूरत हो, तो जनता हमें बता सकती है और हम जमीन उपलब्धता देखकर वहां शौचालय बनाएंगे।

भाजपा सदस्य भारती शेट्टी ने राज्य प्रशासन में एआई के उपयोग के बारे में सवाल उठाया। शिवकुमार ने जवाब दिया कि दुनिया एक नए युग में प्रवेश कर रही है और एआई पर वैश्विक स्तर पर चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया, अदालतों ने एआई के उपयोग पर विचार किया और सीबीएसई को कक्षा 3 से 8 तक पाठ्यक्रम में शामिल करने की सलाह दी गई है।

उन्होंने कहा कि प्रशासन में एआई लागू करने से पहले व्यापक शोध जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई खुद कुछ नया नहीं बना सकता, यह केवल दिए गए डाटा के आधार पर परिणाम देता है। उन्होंने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने एक बार अपने निजी सहायक से जानकारी लेने की बजाय अपनी बेटी के कहने पर चैट जीपीटी का इस्तेमाल किया और उन्हें बहुत सारी जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि उन्होंने इसकी सटीकता में सुधार की जरूरत है।

अंत में शिवकुमार ने कहा कि जब तक दस्तावेज कंप्यूटर में अपलोड नहीं किए जाते, जानकारी डिजिटल रूप से प्राप्त नहीं की जा सकती। उदाहरण के लिए, अदालतों में जानकारी केवल तभी उपलब्ध होती है जब पिछले फैसले अपलोड किए गए हों, लेकिन फैसले केवल उन रिकॉर्ड्स के आधार पर नहीं लिखे जा सकते।


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