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ई-टेंडरिंग मामले में कमलनाथ सरकार सुस्त : माकपा

मध्य प्रदेश के ई-टेंडरिंग घोटाले को लेकर दर्ज की गई प्राथमिकी और उसके बाद हुई गिरफ्तारियों के बाद भी मामले में कथित तौर पर शामिल

ई-टेंडरिंग मामले में कमलनाथ सरकार सुस्त : माकपा
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भोपाल। मध्य प्रदेश के ई-टेंडरिंग घोटाले को लेकर दर्ज की गई प्राथमिकी और उसके बाद हुई गिरफ्तारियों के बाद भी मामले में कथित तौर पर शामिल कई लोगों के अब भी बचे होने पर मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने राज्य सरकार पर सुस्ती बरतने का आज आरोप लगाया है।

माकपा एक बयान में कहा है, "पूर्व मंत्री कुसुम महदेले भी मानती हैं कि ई-टेंडरिंग में हस्ताक्षर तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ने ही किए थे। इससे साफ जाहिर है कि इस घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की संलिप्तता है। मगर अब तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। राज्य सरकार की यह कार्रवाई उसकी सुस्ती को जाहिर करती है।"

उल्लेखनीय है कि इस मामले में 10 अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उसी दिन तत्कालीन मंत्री महदेले ने पन्ना में शाम को कहा था कि ई-टेंडरिंग की फाइल पर तो हस्ताक्षर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने ही किए थे।

कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, पूर्व सांसद सुभाषिनी अली और राज्य सचिव जसविदर सिह ने 15 साल में हुए करोड़ों रुपये के घोटालों की जांच के लिए जन-आयोग के गठन की मांग की थी। जिन चार-पांच घोटालों को तत्काल हाथ में लेने की बात कही गई थी, उनमें व्यापमं जांच पुन: खोलने के अलावा ई-टेंडर घोटाला भी शामिल था।

माकपा की मध्यप्रदेश इकाई ने कहा, "शिवराज सरकार के घोटालों पर कांग्रेस सरकार की सुस्ती कहीं न कहीं सवालों को जन्म देती है। इस सरकार को जनादेश का पालन कर सारे मामलों की जांच और गिरफ्तारियां साथ-साथ करनी चाहिए। 15 वर्षो के घोटालों में शामिल लोगों पर सरकार को कार्रवाई कर यह संदेश देना चाहिए कि वह भ्रष्टों के प्रति कृपालु नहीं है।"

ज्ञात हो कि अभी हाल ही में आर्थिक अन्वेषण शाखा ने ई-टेंडरिंग मामले में प्राथमिकी दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार किया है।


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