Top
Begin typing your search above and press return to search.

जज लोया मामला : कांग्रेस का बड़ा आरोप, मामले को सुप्रीम कोर्ट लाने के लिए दायर याचिका के पीछे आरएसएस

कांग्रेस ने जज लोया की मौत मामले में आज एक बड़ा गंभीर आरोप लगाया। कांग्रेस के कहे का अर्थ निकाला जाए तो BJP-RSS ने अपने आदमी से ही PIL कराकर सर्वोच्च न्यायालय में जांच की मांग खारिज करवा दी

जज लोया मामला : कांग्रेस का बड़ा आरोप, मामले को सुप्रीम कोर्ट लाने के लिए दायर याचिका के पीछे आरएसएस
X

नई दिल्ली। कांग्रेस ने जज लोया की मौत मामले में आज एक बड़ा गंभीर आरोप लगाया। कांग्रेस के कहे का अर्थ निकाला जाए तो BJP-RSS ने अपने आदमी से ही PIL कराकर सर्वोच्च न्यायालय में जांच की मांग खारिज करवा दी।

आज यहाँ एक संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि “सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि PIL का दुरूपयोग होता है, हम सहमत हैं; कई बार इसलिए भी PIL दाखिल की जाती है ताकि किसी चीज को दबाया जा सके।”

उन्होंने कहा कि "ये सरकार जिस तरह से न्यायपालिका से व्यवहार कर रही है उसे सारा देश जानता है।”

सिब्बल ने कहा कि "जज लोया केस कीजाँच के बाद कई जनहित याचिकाएं दायर की गईं। लेकिन हालिया याचिका राजनीति से प्रेरित थी। एक जनहित याचिका सूरज लोलगे द्वारा 27 नवंबर 2017 को नागपुर उच्च न्यायालय पीठ में दाखिल की गई। यह सूरज लोलगे आरएसएस विचारक है जिसने बीजेपी के टिकट पर म्युनिस्पल चुनाव लड़ा था।” लोलगे BJP RSS के खासमखास हैं।

सिब्बल ने खुलासा किया कि "30 जनवरी 2018 को एआईसीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद, सूरज लोलगे और सतीश उइके के भाई के बीच एक फोन वार्तालाप ने खुलासा किया कि लोलगे की याचिका # जजलोया मामले को एससी में ले जाने के इरादेसे दायर की गई, जहां स्वतंत्र जांच को खारिज कर दिया गया था।”

उधर उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त नहीं करने पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए कांग्रेस ने आज कहा कि मोदी सरकार सिर्फ उन्हीं लोगों को सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्त करना चाहती है जो उसके चहेते हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता कपिल सिब्बल ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कानून कहता है कि उन्हीं न्यायाधीशों को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया जाना चाहिए जिनके नाम की सिफारिश चयन मंडल यानी कॉलेजियम ने की है। कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम की सिफारिश की थी और न्यायमूर्ति जोसेफ के बारे में बेहतरीन टिप्पणी की थी।

उन्होंने कहा कि कॉलेजियम की इस टिप्पणी को इस साल 10 जनवरी को उच्चतम न्यायालय ने अपनी बेवसाइट पर लगाया था। वेबसाइट में न्यायमूर्ति जोसेफ को सबसे बेहतर जज बताकर उनकी जमकर तारीफ की गयी थी, लेकिन इस टिप्पणी के बावजूद अब तक उनको उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नहीं बनाया गया। उल्टे उनका नाम कॉलेजियम को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया गया है।

प्रवक्ता ने केंद्र सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि जनहित में उसे न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया को तेज करना चाहिए। उच्चतम न्यायालय में सिर्फ 24 न्यायाधीश हैं, जिनमें से छह इसी साल सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के 410 पद रिक्त हैं। लोगों के मामलों पर जल्दी सुनवाई हो, इसलिए इन पदों पर नियुक्ति होनी चाहिए।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it