विनोद पांडेय का पलटवार- झारखंडियों को रोजगार देना भाजपा को धमकी क्यों लगता है
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू द्वारा लगाए गए आरोपों पर कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि झारखंडियों को रोजगार देने की बात करना आज भाजपा को धमकी जैसा लगने लगा है

हेमंत सोरेन सरकार का बड़ा फैसला: निजी कंपनियों में 75% स्थानीय नियुक्ति
- भाजपा पर आरोप- युवाओं को वोट बैंक समझती है, रोजगार से कोई सरोकार नहीं
- ‘जुमला’ बन गए भाजपा के रोजगार वादे, पांडेय ने दिलाई याद
रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू द्वारा लगाए गए आरोपों पर कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि झारखंडियों को रोजगार देने की बात करना आज भाजपा को धमकी जैसा लगने लगा है।
यह भाजपा की जनविरोधी और युवा विरोधी मानसिकता को उजागर करता है। भाजपा को न तो राज्य के युवाओं की चिंता है और न ही स्थानीय लोगों के भविष्य से कोई सरोकार है। श्री विनोद कुमार पांडेय जी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी झारखंड के युवाओं के रोजगार और भविष्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील हैं।
उनकी सरकार ने न केवल सरकारी नौकरियों में पारदर्शी तरीके से बहालियों की प्रक्रिया शुरू की है, बल्कि निजी क्षेत्र में भी स्थानीय युवाओं को अवसर देने के लिए ठोस और ऐतिहासिक निर्णय लिए हैं। निजी कंपनियों में 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों की नियुक्ति का निर्णय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने युवाओं के व्यापक हित में लिया है, ताकि झारखंड के संसाधनों पर पहला अधिकार झारखंडियों का हो।
श्री पांडेय ने कहा कि यह फैसला भाजपा जैसी नफरत फैलाने वाली पार्टी को समझ में नहीं आ सकता। भाजपा को जब भी स्थानीय अधिकार, रोजगार और सामाजिक न्याय की बात होती है तो वह उसे राजनीति का हथियार बनाकर भ्रम फैलाने लगती है। सच यह है कि भाजपा झारखंड के युवाओं को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करना जानती है, उनके स्थायी रोजगार और सम्मानजनक भविष्य से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
श्री पांडेय ने भाजपा को उसके पुराने वादों की याद दिलाते हुए कहा कि भाजपा केंद्र की सत्ता में यह कहकर आई थी कि हर साल करोड़ों नौकरियां दी जाएंगी और कुल मिलाकर पांच करोड़ रोजगार सृजित किए जाएंगे। लेकिन बाद में स्वयं भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने इस वादे को “जुमला” बता दिया। इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है कि भाजपा के लिए रोजगार कभी प्राथमिकता रहा ही नहीं। भाजपा के लिए असली एजेंडा समाज में नफरत फैलाना, लोगों को बांटना और मुद्दों से ध्यान भटकाना है।
श्री पांडेय ने कहा कि भाजपा की राजनीति नफरत, डर और विभाजन पर टिकी हुई है। जब-जब झारखंड सरकार रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय की बात करती है, भाजपा बौखला जाती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जनकल्याणकारी नीतियों के कारण ही झारखंड की जनता ने उन्हें भारी जनमत और भरोसा दिया है, जिसे भाजपा आज तक पचा नहीं पा रही है।
श्री पांडेय ने स्पष्ट रूप से कहा कि भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू को झारखंड के युवाओं से माफी मांगनी चाहिए। भाजपा के शासनकाल में नियुक्तियों के नाम पर बड़े-बड़े घोटाले हुए, परीक्षाएं रद्द हुईं और युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेला गया। इसके विपरीत, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य में सरकारी नौकरियों की बरसात हो रही है। लगभग सभी विभागों में पारदर्शी तरीके से बहालियां की जा रही हैं और युवाओं को उनका हक मिल रहा है।
श्री पांडेय ने कहा कि असल सच्चाई यह है कि भाजपा एक आदिवासी को मुख्यमंत्री के पद पर एक मिनट भी देखना नहीं चाहती। यही भाजपा की पीड़ा, हताशा और बौखलाहट का मूल कारण है। लेकिन झारखंड की जनता सब समझ चुकी है और आने वाले समय में भी भाजपा को उसके जनविरोधी रवैये का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देती रहेगी।


