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साइबर ठगी पीड़ितों को राहत, झारखंड हाईकोर्ट ने मुआवजा व्यवस्था लागू करने का दिया आदेश

झारखंड में साइबर ठगी और ऑनलाइन लूट के पीड़ितों के लिए राहत भरी खबर है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह एक ऐसी व्यवस्था तुरंत शुरू करे

साइबर ठगी पीड़ितों को राहत, झारखंड हाईकोर्ट ने मुआवजा व्यवस्था लागू करने का दिया आदेश
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रांची। झारखंड में साइबर ठगी और ऑनलाइन लूट के पीड़ितों के लिए राहत भरी खबर है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह एक ऐसी व्यवस्था तुरंत शुरू करे, जिसके जरिए पीड़ित अपनी शिकायत दर्ज करा सकें और ठगी से हुए नुकसान का मुआवजा मांग सकें।

अदालत ने यह निर्देश शुक्रवार को अधिवक्ता उत्कर्ष सिंह की याचिका पर दिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनाक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की बेंच ने पाया कि नियम तो 2003 में ही बन गए थे, लेकिन 21 साल बीत जाने के बाद भी आम जनता को इसका फायदा नहीं मिल रहा था। यह सिस्टम अब तक सिर्फ कागजों पर ही चल रहा था।

हाईकोर्ट ने साफ किया कि झारखंड के आईटी सचिव को इस तरह के मामलों की सुनवाई करने और फैसला लेने का अधिकार पहले ही दिया जा चुका है। लेकिन सिस्टम सक्रिय न होने के कारण ऑनलाइन धोखाधड़ी या डेटा चोरी का शिकार हुए लोग मुआवजे के लिए कहीं अपील नहीं कर पा रहे थे।

अब अदालत ने सरकार को एक महीने के भीतर इस तंत्र को पूरी तरह चालू करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया जितनी सरल होगी, उतने ही ज्यादा लोग इसका उपयोग कर पाएंगे। इसलिए सरकार को एक आसान और यूजर-फ्रेंडली ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव दिया गया है, ताकि लोगों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

फिलहाल ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजने की सुविधा मौजूद है, लेकिन अदालत ने कहा कि इसकी जानकारी व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाई जानी चाहिए। इसके अलावा अदालत ने सरकार को 15 दिनों के भीतर अखबारों और अन्य माध्यमों से इस व्यवस्था की जानकारी देने का निर्देश दिया है, ताकि आम जनता को इसके बारे में पता चल सके। साथ ही छह महीने के भीतर शिकायत दर्ज करने की स्पष्ट और सरल गाइडलाइन तैयार करने और विशेष रूप से छात्रों एवं वरिष्ठ नागरिकों के बीच जागरूकता अभियान चलाने को भी कहा गया है, क्योंकि ये वर्ग अक्सर साइबर ठगी के ज्यादा शिकार होते हैं।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, डेटा लीक और पहचान की चोरी जैसे साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और बदलते समय के साथ इनका स्वरूप भी जटिल होता जा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि पीड़ितों को समय पर और प्रभावी न्याय मिल सके।


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