Top
Begin typing your search above and press return to search.

रांची में है देवी काली का 700 साल पुराना मंदिर, बांस पर लाल-पीले धागे बांधने से पूरी होती है मनोकामना

देश भर में भगवती के समर्पित कई भव्य व भक्ति से भरे देवालय हैं। ऐसा ही दिव्य मंदिर झारखंड की राजधानी रांची से मात्र 60 किलोमीटर दूर देवड़ी गांव में स्थित है। देवड़ी मंदिर भक्तों के लिए एक बेहद प्रसिद्ध और चमत्कारी तीर्थस्थल है। देवी काली को समर्पित यह मंदिर करीब 700 साल पुराना है।

रांची में है देवी काली का 700 साल पुराना मंदिर, बांस पर लाल-पीले धागे बांधने से पूरी होती है मनोकामना
X

रांची। देश भर में भगवती के समर्पित कई भव्य व भक्ति से भरे देवालय हैं। ऐसा ही दिव्य मंदिर झारखंड की राजधानी रांची से मात्र 60 किलोमीटर दूर देवड़ी गांव में स्थित है। देवड़ी मंदिर भक्तों के लिए एक बेहद प्रसिद्ध और चमत्कारी तीर्थस्थल है। देवी काली को समर्पित यह मंदिर करीब 700 साल पुराना है।

देवी काली के मंदिर में बांस के ढांचे पर लाल और पीले रंग के पवित्र धागे बांधने की अनोखी परंपरा है, जिसके बारे में माना जाता है कि सच्चे मन से की गई मन्नत जरूर पूरी होती है। देवड़ी मंदिर बेहद प्राचीन है। यह मंदिर देवी काली के एक विशेष अवतार को समर्पित है। स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, तामार के राजा को देवी के स्वप्न में दर्शन हुए थे, जिसके बाद उन्होंने जंगल में इस पवित्र स्थल की खोज की और मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर की एक और खास बात यह है कि यहां किसी भी प्रकार का नवीनीकरण या बदलाव करने की कोशिश करने वाले को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए मंदिर का मूल स्वरूप आज भी पूरी तरह सुरक्षित और अछूता है। नए निर्माण कार्य मूल संरचना के आसपास ही किए गए हैं।

देवड़ी मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है। इस मंदिर को बिना सीमेंट या किसी जोड़ने वाले पदार्थ के केवल पत्थरों को आपस में फंसाकर बनाया गया है। बलुआ पत्थर की विशाल दीवारों पर जटिल नक्काशी की गई है, जो पौराणिक कथाओं और देवी-देवताओं की कहानियां बयां करती हैं। हर नक्काशी इतनी बारीक है कि देखने वाले को आश्चर्य होता है। मंदिर का सबसे आकर्षक केंद्र देवी की 700 साल पुरानी मूर्ति है। यह मूर्ति लगभग तीन फीट ऊंची है और देवी काली का तेजस्वी रूप है। सबसे खास बात यह है कि देवी की 16 भुजाएं हैं, जो आमतौर पर देखने को नहीं मिलतीं। स्थानीय लोग इसे ‘सोलहभुजी मंदिर’ भी कहते हैं। देवी सुनहरे आभूषणों से सजी हैं और हाथों में धनुष, ढाल, फूल आदि धारण किए हुए हैं।

देवड़ी मंदिर की सबसे चर्चित परंपरा बांस पर धागा बांधने की है। भक्त यहां अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और बांस के ढांचे पर लाल व पीले रंग के पवित्र धागे बांधते हैं। मान्यता है कि सच्चे दिल से बांधे गए धागे से देवी मन्नत जरूर पूरी करती हैं। जब इच्छा पूरी हो जाती है तो भक्त दोबारा मंदिर आकर विधि-विधान से धागा खोलते हैं और देवी का आभार व्यक्त करते हैं। यह परंपरा दूर-दूर से आने वाले भक्तों को खासतौर पर आकर्षित करती है।

मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है बल्कि ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प की दृष्टि से भी बेहद मूल्यवान है। रांची घूमने आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु यहां अवश्य आते हैं। आसपास रांची स्टेट म्यूजियम और योगदा सत्संग सोसाइटी (रांची आश्रम) जैसे अन्य दर्शनीय स्थल भी हैं, जो यात्रा को और यादगार बना देते हैं।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it