झारखंड: मारपीट और जानलेवा हमले के मामले में पूर्व मंत्री बंधु तिर्की समेत सात आरोपी दोषमुक्त
झारखंड प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की को रांची सिविल कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है

रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की को रांची सिविल कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। रांची स्थित एमपी/एमएलए मामलों के विशेष न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा की अदालत ने मारपीट और जानलेवा हमले से जुड़े एक पुराने मामले में साक्ष्यों के अभाव में बंधु तिर्की समेत सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है।
इस मामले में बंधु तिर्की के साथ उनके तीन अंगरक्षक रामदेव प्रसाद, विशाल उरांव व सीनू राम जोंको के अलावा आमोद सिंह, मोहन सिंह और दिलीप कुमार ट्रायल फेस कर रहे थे। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त सबूत पेश न कर पाने के आधार पर सभी को दोषमुक्त कर दिया है।
यह मामला 1 नवंबर 2017 का है, जब भारत स्काउट एंड गाइड झारखंड, रांची के राज्य काउंसिल चुनाव में कथित गड़बड़ी की जांच की जा रही थी। प्राथमिकी के अनुसार, जांच दल के प्रतिनिधि जिला शिक्षा कार्यालय परिसर पहुंचे थे, जहां नरेश कुमार नामक व्यक्ति को प्रवेश करने से रोका गया था।
आरोप लगाया गया था कि बंधु तिर्की के अंगरक्षकों ने नरेश कुमार के साथ मारपीट की, उनका कॉलर पकड़ा और शरीर पर कट्टा रखकर जान से मारने की धमकी दी। आरोपियों पर लोहे की रॉड से हमला करने, गाली-गलौज करने और गले से सोने की चेन छीनने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए थे।
इस घटना को लेकर 1 नवंबर 2017 को ही रांची के कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि मामले में लगाए गए आरोपों को सिद्ध करने के लिए ठोस और पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। सात वर्षों तक चली इस कानूनी प्रक्रिया के समापन पर बंधु तिर्की और उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली है।


