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एफआईआर दर्ज न करने पर झारखंड हाईकोर्ट नाराज, एसएसपी को किया तलब

झारखंड हाई कोर्ट एक आपराधिक अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने धनबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की

एफआईआर दर्ज न करने पर झारखंड हाईकोर्ट नाराज, एसएसपी को किया तलब
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रांची। झारखंड हाई कोर्ट एक आपराधिक अपील पर सुनवाई के दौरान अदालत ने धनबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने संज्ञेय अपराध की शिकायत के एक मामले में एफआईआर दर्ज न किए जाने को गंभीर मानते हुए धनबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को तलब कर लिया है।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी को मंगलवार को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने को कहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई।

यह मामला रवि साव नामक एक आरोपी से जुड़ा है, जिसे पहले एक आपराधिक मामले में उच्च न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी। जमानत पर बाहर आने के बाद भी आरोपी के व्यवहार में कोई सुधार नहीं दिखा और पीड़िता ने पुनः अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए उसकी जमानत रद्द करने की गुहार लगाई।

पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने जेल से बाहर आते ही सोशल मीडिया के जरिए उसे डराने-धमकाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया। पीड़िता ने इस संबंध में साइबर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें स्पष्ट रूप से धमकी देने और आईटी एक्ट के तहत आने वाले अपराधों का उल्लेख था।

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि पीड़िता द्वारा दी गई शिकायत प्रथम दृष्टया एक गंभीर संज्ञेय अपराध को दर्शाती है। इसके बावजूद धनबाद पुलिस ने इस पर एफआईआर दर्ज नहीं की।

अदालत ने माना कि पीड़िता के साथ किया जा रहा यह व्यवहार आपराधिक श्रेणी में आता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए खंडपीठ ने धनबाद एसएसपी को निर्देश दिया है कि वे मंगलवार को सशरीर हाजिर होकर पूरे घटनाक्रम पर जवाब दें। मामले में अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता शैलेश कुमार सिंह ने अपना पक्ष रखा।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीकेपी

केटीआर ने कहा कि केसीआर ने तेलंगाना राज्य गठन से पहले की परिस्थितियों और उस समय के राजनीतिक माहौल पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि केसीआर ने 25 वर्षों तक संघर्ष, रणनीति और कई बार इस्तीफों के जरिए राज्य गठन की लड़ाई लड़ी, जो अंततः सफल रही।

उन्होंने किसानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि तेलंगाना एक बार फिर राज्य गठन से पहले जैसी कृषि संकट की स्थिति देख रहा है। उन्होंने बिजली कटौती, किसानों की आत्महत्या, बीज और खाद की कमी तथा धान खरीद में देरी जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।

बीआरएस कार्यकारी अध्यक्ष ने कांग्रेस सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि जो राज्य विकास के लिए पहचाना जाता था, उसे अब अव्यवस्था की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना को अवैध जमीन कब्जों और मकान तोड़ने में "नंबर वन" बनाया जा रहा है।

उन्होंने मिशन भागीरथ जैसी पेयजल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सरकार की विफलता पर सवाल उठाए और धान खरीद के मुद्दे पर निर्णायक कदम न उठाने का आरोप लगाया।


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