Top
Begin typing your search above and press return to search.

सीएम हेमंत सोरेन ने खनिज संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप लगाई गुहार, पत्र लिखकर कहा- यह संघीय ढांचे के प्रतिकूल

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संसद के दोनों सदनों से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पांच पन्नों का पत्र लिखा है

सीएम हेमंत सोरेन ने खनिज संशोधन विधेयक पर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप लगाई गुहार, पत्र लिखकर कहा- यह संघीय ढांचे के प्रतिकूल
X

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संसद के दोनों सदनों से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पांच पन्नों का पत्र लिखा है। मुख्यमंत्री ने विधेयक को केंद्र-राज्य संबंधों के संतुलन और झारखंड की वित्तीय स्वायत्तता के लिए गंभीर चुनौती बताते हुए राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप का आग्रह किया है। सीएम ने यह पत्र सोशल मीडिया पर भी साझा किया है।

सीएम हेमंत सोरेन ने पत्र में कहा कि केंद्र का यह नया कानून लागू हुआ तो झारखंड को खान-खनिज से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। इसका असर राज्य की सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और दूसरी जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है। सोरेन ने कहा कि झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्य के लिए यह सिर्फ पैसे का मामला नहीं है। यह सवाल भी है कि राज्य को अपनी खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व पर कितना अधिकार रहेगा और केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का संतुलन कैसे बना रहेगा।

मुख्यमंत्री ने विधेयक में प्रस्तावित एमएमडीआर अधिनियम की नई धारा 9डी पर आपत्ति जताई है। उनके मुताबिक, इस प्रावधान के बाद राज्य सरकारें खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर कोई कर, सेस या दूसरी लेवी लगाती हैं तो उस पर केंद्र की तय शर्तें और सीमाएं लागू होंगी।

सोरेन का कहना है कि इसका असर पहले से लगाए गए सेस की बकाया रकम पर भी पड़ सकता है। उन्होंने अपने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय की नौ जजों वाली संविधान पीठ के खनिज संबंधी फैसले का भी जिक्र किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, शीर्ष अदालत ने राज्यों को खनिज वाली जमीन पर कर या सेस लगाने का अधिकार माना था। इसी फैसले के बाद झारखंड विधानसभा ने वर्ष 2024 में मिनरल बेयरिंग लैंड सेस कानून बनाया था।

सोरेन ने पत्र में झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनन से होने वाली आय के आंकडे भी दिए हैं। उन्होंने झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024-25 में राज्य के अपने गैर-कर राजस्व का करीब 84.9 प्रतिशत हिस्सा खनन क्षेत्र से आया। मिनरल बेयरिंग लैंड सेस से 2024-25 में 1,379 करोड़ रुपए और 2025-26 में 7,488 करोड़ रुपए मिले। वर्ष 2026-27 में इससे करीब 13,215 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि नया कानून लागू होने पर राज्य को हर साल हजारों करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का नुकसान हो सकता है। इसका असर उन योजनाओं पर पड़ सकता है, जिनके लिए राज्य सरकार को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे 50 लाख से ज्यादा महिलाओं को आर्थिक मदद दी जा रही है। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं भी राज्य की आर्थिक क्षमता पर निर्भर हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सेस की रकम किसी एक योजना के लिए सीधे तय नहीं है, लेकिन इस अतिरिक्त आय से राज्य को अपनी योजनाएं चलाने में मदद मिलती है।

सीएम हेमंत सोरेन ने पत्र में झारखंड की खनिज संपदा से जुड़े पुराने सवालों को भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश के औद्योगिक विकास में झारखंड ने बड़ा योगदान दिया है, लेकिन खनन की कीमत यहां के लोगों, खासकर आदिवासी समाज को विस्थापन, जमीन के नुकसान, प्रदूषण और पारंपरिक रोजगार के खत्म होने के रूप में चुकानी पड़ी है। ऐसे में खनिज से होने वाली कमाई का उचित हिस्सा खनन प्रभावित इलाकों के विकास पर खर्च होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को उनके झारखंड से पुराने जुड़ाव की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 से 2021 तक राज्यपाल रहते हुए राष्ट्रपति ने आदिवासी और खनन प्रभावित इलाकों को करीब से देखा है और यहां के लोगों की समस्याओं को समझा है। उन्होंने राष्ट्रपति से विधेयक के असर पर गंभीरता से विचार करने और संविधान के तहत उपलब्ध विकल्पों के आधार पर उचित फैसला लेने का आग्रह किया है।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it