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जम्मू-कश्मीर से उठी आवाज, 'पीओजेके में लंबे समय से पाकिस्तानी सेना का दबदबा, लोगों का हो रहा दमन'

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में हाल ही में भारी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और गोलीबारी में 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। श्रीनगर में आईएएनएस से बातचीत के दौरान राजनीतिक विश्लेषक फारूक वानी ने इस घटना को बेहद दुखद और चिंताजनक बताया।

जम्मू-कश्मीर से उठी आवाज, पीओजेके में लंबे समय से पाकिस्तानी सेना का दबदबा, लोगों का हो रहा दमन
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श्रीनगर। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में हाल ही में भारी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और गोलीबारी में 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। श्रीनगर में आईएएनएस से बातचीत के दौरान राजनीतिक विश्लेषक फारूक वानी ने इस घटना को बेहद दुखद और चिंताजनक बताया।

उन्होंने कहा, "बॉर्डर के उस पार का इलाका, जिसे हम हमारा क्षेत्र मानते हैं, वहां हालात बेहद खराब हैं।" वानी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग की, जो मानवाधिकारों के खिलाफ है। इसमें 30 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है तथा 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

उन्होंने कहा कि पीओजेके में लंबे समय से सैन्य और अर्धसैनिक बलों का दबदबा रहा है और स्थानीय लोगों को अपनी मांगें रखने के बावजूद गंभीर दमन का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति न केवल राजनीतिक बल्कि मानवीय संकट भी है।

उनके अनुसार, प्रदर्शनकारी अपने बुनियादी अधिकारों और आर्थिक राहत की मांग कर रहे थे, लेकिन हिंसा के कारण हालात और बिगड़ गए। वानी ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र के लोग भारत के साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से जुड़े हुए हैं और इस मुद्दे पर लंबे समय से अलग-अलग स्तरों पर चर्चा होती रही है।

उन्होंने कहा, "जब से पाकिस्तान बना है, तब से आर्मी ने पीओजेके में हमेशा अपना दबदबा बनाए रखा है। लेकिन, आज उन्होंने हमारे ही लोगों को मारकर और घायल करके सारी हदें पार कर दीं, जबकि वे सिर्फ अपने हक मांग रहे थे। हमने हमेशा कहा है कि इस इलाके को हमारे इलाके में मिला देना चाहिए। हमने दिल्ली और कश्मीर दोनों जगह कई बार कहा है कि पीओजेके एक कब्जा किया हुआ इलाका है, जिसे पाकिस्तान ने जबरदस्ती अपने कब्जे में ले लिया है। देर-सवेर, पाकिस्तान को हर हाल में इसे छोड़ना ही होगा।"

उन्होंने कहा कि अगर हम 'ऑपरेशन सिंदूर' की बात करें तो उस समय भी हमला हुआ था। हो सकता है कि तब कुछ कमियां रही हों, लेकिन आखिर में पाकिस्तान को यह इलाका खाली करना ही होगा। यह हमारा इलाका है और इसे हमारे साथ फिर से मिला देना चाहिए। वहां के लोग हमारी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को शेयर करते हैं। अगर हमारे ही लोगों पर जुल्म जारी रहा, तो यह हम सभी के लिए बहुत बुरा होगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का 12 साल का कार्यकाल शानदार रहा है। वह एक ऐसे लीडर हैं, जिन्हें लगातार पब्लिक का सपोर्ट और भरोसा मिला है। लोग उन पर भरोसा करते हैं और उन्हें बार-बार मैंडेट दिया है, जिससे वह बार-बार प्राइम मिनिस्टर बन पाए हैं। उनकी लीडरशिप में देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका कद काफी बढ़ा है, और दुनिया भर में भारत की इमेज और मजबूत और असरदार हुई है। उन्होंने दुनिया भर में भारत की पहचान बनाई है, और उनकी विदेश नीति तारीफ के काबिल है।

दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के प्रांतीय सचिव शफकत मीर ने भी दुख और चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे एक गंभीर मानवीय मुद्दा बताते हुए कहा कि निहत्थे नागरिकों पर की गई हिंसा किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती। पीओजेके में स्थानीय लोग लगातार कठिनाइयों और दमन का सामना कर रहे हैं। यह घटना मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन को दर्शाती है और इसके खिलाफ सभी को आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

मीर ने भारत और पाकिस्तान के प्रशासनिक दृष्टिकोण की तुलना करते हुए कहा कि भारतीय सुरक्षा बल आमतौर पर आपदा या संकट की स्थिति में नागरिकों की सहायता के लिए आगे आते हैं, जबकि पीओजेके में स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपील की कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।


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