वैष्णो देवी मेडिकल कालेज विवाद : सरकार ने प्रवेश को रद्द करने के बजाय एमबीबीएस कोर्स चलाने की वापस ली अनुमति
केंद्र सरकार ने वैष्णो देवी मेडिकल कालेज में प्रवेश का मुद्दा सुलझा लिया है। एक हैरानगी भरे फैसले में सरकार ने प्रवेश को रद्द करने की बजाय काजलेज को एमबीबीएस कोर्स चलाने की दी गई अनुमति ही वापस ले ली गई है। ताकि भविष्य में ऐसी किसी परिस्थिति से जूझना ही न पडे़

जम्मू। केंद्र सरकार ने वैष्णो देवी मेडिकल कालेज में प्रवेश का मुद्दा सुलझा लिया है। एक हैरानगी भरे फैसले में सरकार ने प्रवेश को रद्द करने की बजाय काजलेज को एमबीबीएस कोर्स चलाने की दी गई अनुमति ही वापस ले ली गई है। ताकि भविष्य में ऐसी किसी परिस्थिति से जूझना ही न पडे़। हालांकि यह जम्मू के लिए एक नुक्सान तो माना जा रहा है पर इस मुद्दे पर आंदोलन चलाने वाली संघर्ष समिति इसे अपनी जीत मान रही है।
जम्मू कश्मीर के रियासी में माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एक्सीलेंस को एकेडमिक ईयर 2025-26 के लिए एमबीबीएस कोर्स चलाने के लिए दिया गया परमिशन लेटर वापस ले लिया है, क्योंकि उसने न्यूनतम मानकों का उल्लंघन किया था। वैसे श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के नेताओं ने बुधवार को रियासी के श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कालेज में एडमिशन रद्द होने को एक जीत बताया और इस फैसले में अपनी सकारात्मक भूमिका के लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा का आभार व्यक्त किया।
यह कार्रवाई मेडिकल कालेज के खिलाफ कई ग्रुप्स के लगातार विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई है, जिसमें सवाल उठाया गया है कि इसके पहले बैच में ज्यादातर एमबीबीएस स्टूडेंट मुस्लिम क्यों थे। बताया जा रहा है कि मंगलवार को एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड की एक टीम ने औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मिनिमम एकेडमिक, टीचिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैंडर्ड के पालन में कमियां पायी। साथ ही एकेडमिक साल के लिए एमबीबीएस कोर्स चलाने की परमिशन वापस लेने का फैसला किया।
एनएमसी के अनुसार स्टूडेंट के हितों की रक्षा के लिए केंद्र शासित प्रशासन को एकेडमिक ईयर 2025-26 के दौरान एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को जम्मू कश्मीर के दूसरे मेडिकल कालेजों में सामान्य से अधिक सीटों पर ट्रांसफर करने का अधिकार दिया गया है, ताकि उनकी पढ़ाई पर असर न पड़े और उनका भविष्य सुरक्षित रहे। बोर्ड ने कहा कि पहले से एडमिशन ले चुके स्टूडेंट्स के हितों की रक्षा के लिए, उन्हें जम्मू कश्मीर के दूसरे मेडिकल कालेजों में शिफ्ट करने का फैसला किया गया है।
इस बीच एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए, संघर्ष समिति के नेतृत्व ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान लेफ्टिनेंट गवर्नर के खिलाफ की गई टिप्पणियों को अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए, यह कहते हुए कि वे आंदोलन की तीव्रता का हिस्सा थीं। नेताओं ने दावा किया कि, विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लेफ्टिनेंट गवर्नर ने केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ मिलकर मेडिकल कालेज में सभी एमबीबीएस सीटों पर एडमिशन रद्द करने में रचनात्मक भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि लगभग 45 दिनों तक चले इस आंदोलन को समाज के विभिन्न वर्गों से समर्थन मिला। समित के एक नेता ने कहा कि इस आंदोलन के दौरान हर वर्ग हमारे साथ खड़ा रहा। हम केंद्र सरकार के आभारी हैं कि उसने हिंदू समुदाय की भावनाओं का सम्मान किया। प्रेस कांफ्रेंस के बाद, समिति के नेताओं और समर्थकों ने मिठाई बांटी, नाचा और ढोल बजाकर अपने आंदोलन की सफलता का जश्न मनाया।
इतना जरूर था कि श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कालेज में एडमिशन रद्द होना जम्मू कश्मीर में एक गहन राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है, जिससे योग्यता, शासन और हर चीज में धर्म को मिलाने के मुद्दों पर विभिन्न हलकों से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।


