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रोशनी का इंतजार लंबा होता जा रहा है जम्मू कश्मीर में क्योंकि आंखों का दान बहुत कम

प्रदेश में उन लोगों के इंतजार का फिलहाल कोई अंत नहीं है जो अपनी आंखों की रोशनी पाना चाहते हैं। कारण प्रदेश में आंखों के दानकर्ता न के ही बराबर हैं। अधिकारियों ने बताया कि जम्मू और कश्मीर के अलग-अलग ट्रांसप्लांट अस्पतालों में नेशनल रजिस्ट्री पर रजिस्टर्ड लगभग 200 मरीज फिलहाल कार्निया ट्रांसप्लांट (केराटोप्लास्टी) के लिए वेटिंग लिस्ट में हैं, जो स्थानीय स्तर पर आंखों के दान की गंभीर कमी को दिखाता है, खासकर कश्मीर डिवीजन में

रोशनी का इंतजार लंबा होता जा रहा है जम्मू कश्मीर में क्योंकि आंखों का दान बहुत कम
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जम्मू। प्रदेश में उन लोगों के इंतजार का फिलहाल कोई अंत नहीं है जो अपनी आंखों की रोशनी पाना चाहते हैं। कारण प्रदेश में आंखों के दानकर्ता न के ही बराबर हैं।

अधिकारियों ने बताया कि जम्मू और कश्मीर के अलग-अलग ट्रांसप्लांट अस्पतालों में नेशनल रजिस्ट्री पर रजिस्टर्ड लगभग 200 मरीज फिलहाल कार्निया ट्रांसप्लांट (केराटोप्लास्टी) के लिए वेटिंग लिस्ट में हैं, जो स्थानीय स्तर पर आंखों के दान की गंभीर कमी को दिखाता है, खासकर कश्मीर डिवीजन में।

जम्मू कश्मीर स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जीएमसी श्रीनगर में लगभग 150 मरीज कार्निया ट्रांसप्लांट का इंतार कर रहे हैं, जबकि जीएमसी जम्मू में लगभग 20 मरीज वेटिंग लिस्ट में हैं। बाकी मरीज केंद्र शासित प्रदेश में इसी तरह की प्रक्रियाएं करने वाले प्राइवेट अस्पतालों में लिस्टेड हैं।

कार्निया ट्रांसप्लांट की सुविधा जम्मू और कश्मीर दोनों डिवीजन में उपलब्ध है, जिसमें जीएमसी श्रीनगर और जीएमसी जम्मू सबसे ज्यादा सुविधाओं वाले हैं। कई प्राइवेट सेंटर भी यह प्रक्रिया करते हैं। हालांकि, स्थानीय दान की कम दर, खासकर कश्मीर में, के कारण ज्घ्यादातर सेंटर केंद्र शासित प्रदेश के बाहर से कार्निया मंगवाने के लिए मजबूर हैं।

इसके विपरीत, जम्मू कश्मीर में स्टेट आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन की शुरुआत के बाद से जम्मू में कार्निया दान की दर अपेक्षाकृत ज्घ्यादा रही है। अधिकारियों ने बताया कि पिछले ढाई सालों में जम्मू क्षेत्र में 90 से ज्यादा कार्निया ट्रांसप्लांट किए गए हैं, जिसमें सभी कार्निया स्थानीय स्तर पर दान किए गए थे।

अंगदान सोसायटी जम्मू कश्मीर की जाइंट डायरेक्टर डा पूनम महाजन ने बताया कि आर्गनाइजेशन जागरूकता अभियान और काउंसलिंग के जरिए अंग और टिश्यू दान को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उनका कहना था कि सोसायटी जम्मू कश्मीर सार्वजनिक जागरूकता गतिविधियां चला रहा है और जीवित और मृत दोनों तरह के दान को प्रोत्साहित कर रहा है, जिसमें ब्रेन स्टेम डेथ के मामले भी शामिल हैं।

यह भी सच है कि हाल ही में, जम्मू और कश्मीर को अंग प्रत्यारोपण में सर्वश्रेष्ठ उभरते केंद्र शासित प्रदेश का पुरस्कार मिला, जो इस क्षेत्र में धीरे-धीरे हो रही प्रगति को दर्शाता है।

वर्तमान में, जम्मू और कश्मीर में तीन किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधाएं हैं, जो हैं जीएमसी जम्मू, जीएमसी श्रीनगर और शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज श्रीनगर।

एक रिसर्च के अनुसार, कार्निया संबंधी विकार भारत जैसे विकासशील देशों में अंधेपन का दूसरा सबसे आम कारण बन गए हैं, जहां दुनिया की सबसे बड़ी कार्निया से अंधे लोगों की आबादी है।

कश्मीर के एक टर्शियरी केयर सेंटर के 2022 के एक अध्ययन में पाया गया कि संक्रामक केराटाइटिस 57.54 प्रतिशत के साथ कार्निया से अंधेपन का मुख्य कारण है, इसके बाद बुलस केराटोपैथी (17.30 परसेंट), ट्रामा (10.26 परसेंट) और एडवांस्ड केराटोकोनस (7.5 प्रतिशत) हैं।


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