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जम्मू-कश्मीर के सात उत्पादों को मिला जीआई टैग

जम्मू-कश्मीर के कृषि एवं पारंपरिक उत्पादों को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए केंद्र शासित प्रदेश के सात उत्पादों को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया है, जबकि करीब 20 अन्य उत्पाद वर्तमान में पंजीकरण की प्रक्रिया में हैं।

जम्मू-कश्मीर के सात उत्पादों को मिला जीआई टैग
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के कृषि एवं पारंपरिक उत्पादों को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए केंद्र शासित प्रदेश के सात उत्पादों को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया है, जबकि करीब 20 अन्य उत्पाद वर्तमान में पंजीकरण की प्रक्रिया में हैं।

अधिकारियों ने रविवार को बताया कि जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों को कानूनी सुरक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशिष्ट पहचान मिलेगी।

जीआई मान्यता प्राप्त करने वाले उत्पादों में रामबन का सुलाई शहद, भद्रवाह राजमाश, उधमपुर-रामनगर का कलादी, जम्मू का बासमती चावल, रामबन अनारदाना, मुशकबुदजी चावल तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कश्मीर केसर शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन उत्पादों की विशिष्ट गुणवत्ता, पारंपरिक उत्पादन पद्धति और भौगोलिक विशेषता को देखते हुए इन्हें यह दर्जा प्रदान किया गया है।

अधिकारियों ने कहा कि जीआई टैगिंग से क्षेत्र-विशिष्ट उत्पादों को नकल और दुरुपयोग से बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही इनकी ब्रांडिंग मजबूत होगी और निर्यात क्षमता में भी वृद्धि होगी। यह प्रमाणन इन वस्तुओं की विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को औपचारिक मान्यता देता है। सात उत्पादों के अलावा लगभग 20 अन्य फसलें और पारंपरिक वस्तुएं भी भौगोलिक पंजीकरण के लिए प्रक्रियाधीन हैं, जो स्थानीय किस्मों के संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है।

इसी बीच क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को भी बढ़ावा मिला है। जम्मू स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और जम्मू और कश्मीर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कश्मीर ने मिलकर अब तक 164 पेटेंट पंजीकृत किए हैं। इसे कृषि प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि जीआई टैग प्राप्त करना कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में बौद्धिक संपदा अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे मूल्यवर्धन, ब्रांड पहचान और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी। जीआई टैग एक बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) है, जो वस्तुओं के भौगोलिक संकेत अधिनियम, 1999 के तहत प्रदान किया जाता है। यह उन उत्पादों की पहचान करता है जो किसी विशिष्ट क्षेत्र से उत्पन्न होते हैं और अपनी गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या विशेष गुणों के कारण अलग पहचान रखते हैं।

यह टैग अनधिकृत उपयोग को रोकता है, विपणन में सहायता करता है, और पारंपरिक, कृषि, या निर्मित वस्तुओं की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है। जीआई चिह्न उत्पाद पर अंकित होकर उसकी विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति जैसे किसी क्षेत्र या शहर को दर्शाता है, जिससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलती है।


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