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वैष्णो देवी के पास सड़क हादसा, सीआईएसएफ के 8 जवान और चालक घायल

जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में माता वैष्णो देवी मंदिर के पास हुए एक सड़क हादसे में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के आठ जवान और एक नागरिक चालक घायल हो गए।

वैष्णो देवी के पास सड़क हादसा, सीआईएसएफ के 8 जवान और चालक घायल
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में माता वैष्णो देवी मंदिर के पास रविवार को हुए एक सड़क हादसे में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के आठ जवान और एक नागरिक चालक घायल हो गए।

पुलिस के अनुसार, यह हादसा तब हुआ जब सीआईएसएफ जवानों को लेकर जा रही एक बस ताराकोट मार्ग पर पलट गई।

अधिकारियों ने बताया कि घायल जवानों में हेड कांस्टेबल सैमी कुमार, हेड कांस्टेबल एम.एम. दुबे और कांस्टेबल पी.के. त्राया की हालत गंभीर बताई जा रही है।

गंभीर रूप से घायल जवानों को कटरा स्थित नारायणा अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अन्य घायलों में एक सब-इंस्पेक्टर और नागरिक चालक वीरेंद्र सिंह शामिल हैं। इन्हें कटरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया है। उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, वैष्णो देवी मंदिर क्षेत्र में तैनात सीआईएसएफ के जवान ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने कैंप लौट रहे थे, तभी यह हादसा हुआ।

जम्मू-कश्मीर में सड़क दुर्घटनाओं के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें दुर्गम पहाड़ी इलाके, लापरवाही से वाहन चलाना और सड़क ढांचे की कमी प्रमुख हैं। ओवरलोडिंग, यातायात नियमों का कमजोर पालन और आपातकालीन सेवाओं के देर से पहुंचने की समस्या भी हादसों को बढ़ाती है।

अत्यधिक गति से वाहन चलाना, अंधे मोड़ों पर ओवरटेक करना और जल्दबाजी में ड्राइविंग करना आम दुर्घटनाओं का कारण बनता है। मोबाइल फोन का इस्तेमाल और वाहन चलाते समय मैसेज करना भी हादसों का जोखिम बढ़ाता है।

इसके अलावा, बिना पर्याप्त प्रशिक्षण वाले लोगों द्वारा वाहन चलाना, खासकर दोपहिया वाहन चला रहे किशोरों की संख्या बढ़ना भी दुर्घटनाओं की एक बड़ी वजह है। शराब या नशीले पदार्थों के सेवन के बाद वाहन चलाना भी गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

डोडा, रामबन और किश्तवाड़ जैसे जिलों में संकरी और घुमावदार सड़कें, गहरी खाइयां और ब्लाइंड स्पॉट यात्रा को और अधिक खतरनाक बना देते हैं। कई स्थानों पर सुरक्षा दीवारें, क्रैश बैरियर और चेतावनी संकेतों जैसी जरूरी सुविधाओं का भी अभाव है।

बार-बार होने वाले भूस्खलन, घना कोहरा, भारी बारिश और पहाड़ियों से गिरने वाले पत्थर भी सड़क यात्रा को जोखिमभरा बना देते हैं।

ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में यात्री वाहनों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने की समस्या भी आम है, जिससे वाहन का संतुलन और ब्रेकिंग क्षमता प्रभावित होती है। वहीं, पुराने और खराब स्थिति वाले वाहनों का संचालन तथा हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल न करना हादसों में मौत और गंभीर चोटों का खतरा बढ़ा देता है।


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