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मोबाइल टावर, सड़क और बंकर से बदली सीमावर्ती इलाकों की जिंदगी : डॉ. जितेंद्र सिंह

पाकिस्तान सीमा से सटे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में विकास की नई तस्वीर उभर रही है। कभी बुनियादी सुविधाओं, संचार व्यवस्था और सुरक्षा चुनौतियों से जूझने वाले इन इलाकों में अब सड़क, मोबाइल कनेक्टिविटी और जनसुविधाओं का विस्तार देखने को मिल रहा है

मोबाइल टावर, सड़क और बंकर से बदली सीमावर्ती इलाकों की जिंदगी : डॉ. जितेंद्र सिंह
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कठुआ। पाकिस्तान सीमा से सटे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में विकास की नई तस्वीर उभर रही है। कभी बुनियादी सुविधाओं, संचार व्यवस्था और सुरक्षा चुनौतियों से जूझने वाले इन इलाकों में अब सड़क, मोबाइल कनेक्टिविटी और जनसुविधाओं का विस्तार देखने को मिल रहा है। इसी बीच सीमावर्ती क्षेत्र में आयोजित जन दरबार कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की जनसंपर्क और विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि प्रशासन को गांवों तक ले जाने की पहल से लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान संभव हो रहा है, जबकि सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों का असर भी अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, हम लगभग जीरो लाइन पर हैं। यह अंतरराष्ट्रीय सीमा है, पाकिस्तान की सीमा है। पहली बार पिछले 12-13 वर्षों में पीएम मोदी के आने के बाद यहां के लोगों को सुविधाएं मिलीं, सहूलियत मिली। पहले यह आलम था कि यहां मोबाइल टावर नहीं थे, संचार व्यवस्था प्रभावित रहती थी, बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता था, सड़कें नहीं थीं और लोगों को पैदल चलना पड़ता था। आज यहां सड़कों का भी जाल बिछा है, मोबाइल टावर भी बने हैं। एलओसी के पास जो आरक्षण दिया गया था, यहां नहीं था, अब वह भी दिया गया है। इसलिए आज का यह जन दरबार कार्यक्रम महत्वपूर्ण था।

उन्होंने कहा कि दरअसल कुछ वर्षों से हमने एक सिलसिला शुरू किया है कि केवल जिला स्तर तक सीमित न रहकर ब्लॉक और पंचायत स्तर तक जाकर लोगों के बीच बैठा जाए, उनकी समस्याएं सुनी जाएं। साथ ही सभी अधिकारियों को भी वहीं बैठाया जाता है। इसका लाभ यह होता है कि बहुत सारे ऐसे विषय और समस्याएं हैं, जिनका मौके पर ही निस्तारण हो जाता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारे गांव के लोग बहुत सरल और संकोची होते हैं। वे सरकारी दफ्तरों में जाने से भी कई बार हिचकिचाते हैं। यहां उन्हें अधिकारियों के साथ आमने-सामने बैठकर अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। आज भी लगभग दो से ढाई घंटे तक जन दरबार चला और अधिकांश मामलों का या तो वहीं समाधान कर दिया गया या फिर उनके समाधान के लिए रोडमैप तैयार कर लिया गया।

उन्होंने कहा कि आज यह स्थिति है कि यदि हमने देश में सबसे पहले बंकर बनाए, तो इसी सेक्टर में बनाए। वर्ष 2015 में इसका काम शुरू हुआ था। लगभग दो से ढाई हजार बंकर पहले चरण में बने, फिर एक हजार और बनाए गए। आज ये बंकर लगभग एक कमरे के फ्लैट जैसी सुविधाओं से युक्त हैं। पीएम मोदी के आशीर्वाद से अब गोलीबारी का सिलसिला भी बंद हो गया है। पिछले 12-13 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है। नई पीढ़ी को शायद यह अनुभव भी न हो कि पहले यहां क्या परिस्थितियां थीं। हर तीसरे दिन सीमा पार से गोलीबारी होती थी। आज गोलीबारी भी बंद है, बंकर भी बने हुए हैं और लोगों को घर-घर सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बदलाव स्पष्ट दिखाई देता है। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के जीवन में बड़ा परिवर्तन आया है। जहां तक रेल सेवाओं का प्रश्न है, कोरोना काल के दौरान पूरे देश में रेलगाड़ियां बंद की गई थीं। उसके बाद धीरे-धीरे अधिकांश रेलगाड़ियां पुनः शुरू की गईं, जबकि कुछ अभी तक शुरू नहीं हो पाईं। रेलवे के पास भी इसके अपने तर्क हैं। कई नई ट्रेनें शुरू की गई हैं, यहां तक कि दो-दो वंदे भारत ट्रेनें भी प्रारंभ हो गई हैं।

उन्होंने कहा कि जहां यात्रियों की अधिक आवश्यकता होती है, वहां सेवाओं को पुनः शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। किसी ट्रेन को एक मिनट के लिए भी रोकना और फिर उसे दोबारा चलाना भी रेलवे के लिए एक अतिरिक्त खर्च का विषय होता है।

उन्होंने कहा कि हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। जैसे पहले हमने मांग की थी कि जम्मू मेल का यहां ठहराव होना चाहिए और उसका स्टॉपेज मिला भी। अब यदि किसी अन्य ट्रेन के ठहराव की मांग आती है, तो उसके लिए भी हम प्रयास कर रहे हैं।


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