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जम्मू संभाग में बड़ी कामयाबी: ऊधमपुर में 22 घंटे चली मुठभेड़ में दो आतंकी ढेर, किश्तवाड़ में एक आतंकी मारा गया
मारे गए आतंकियों में जैश-ए-मोहम्मद के मुखौटा संगठन ‘कश्मीर टाइगर्स’ (केटी) का शीर्ष कमांडर जुबैर और कमांडर अबू मुआविया शामिल हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि जुबैर पांच आतंकियों के एक मॉड्यूल का नेतृत्व कर रहा था, जबकि अबू मुआविया वर्ष 2023 से सक्रिय था और कई आतंकी घटनाओं में संलिप्त रहा है।

श्रीनगर: जम्मू संभाग के पहाड़ी और घने जंगलों में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों के बीच सुरक्षा बलों को बुधवार को बड़ी सफलता मिली। ऊधमपुर जिले के ऊपरी जंगल क्षेत्र में 22 घंटे तक चली मुठभेड़ में दो कुख्यात आतंकियों को मार गिराया गया। वहीं किश्तवाड़ के बर्फ से ढके जंगलों में हुई एक अन्य मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को ढेर कर दिया। दोनों क्षेत्रों में शेष आतंकियों की तलाश के लिए तलाशी अभियान जारी है।
प्राकृतिक गुफा में छिपे थे आतंकी
सूत्रों के अनुसार, ऊधमपुर जिले के रामनगर और बसंतगढ़ के बीच ऊपरी जंगल जगरेडा क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद सेना की सीआईएफ डेल्टा यूनिट, व्हाइट नाइट कोर, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने मंगलवार को संयुक्त अभियान शुरू किया। इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन किया’ नाम दिया गया।
मंगलवार शाम करीब चार बजे सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। आतंकियों ने एक प्राकृतिक गुफा को ठिकाना बना रखा था और वहीं से फायरिंग कर रहे थे। इलाके की भौगोलिक परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण थीं- घना जंगल, ऊंचाई और सीमित दृश्यता। आतंकियों की सटीक स्थिति का पता लगाने के लिए ड्रोन की मदद ली गई। रातभर क्षेत्र की घेराबंदी बनाए रखी गई। सुरक्षाबलों ने संयम और रणनीतिक धैर्य के साथ ऑपरेशन जारी रखा। बुधवार दोपहर को गुफा को रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) से निष्क्रिय किया गया। इसके बाद तलाशी के दौरान दो आतंकियों के शव बरामद किए गए।
‘मोस्ट वांटेड’ कमांडर होने की आशंका
गैर-आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मारे गए आतंकियों में जैश-ए-मोहम्मद के मुखौटा संगठन ‘कश्मीर टाइगर्स’ (केटी) का शीर्ष कमांडर जुबैर और कमांडर अबू मुआविया शामिल हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि जुबैर पांच आतंकियों के एक मॉड्यूल का नेतृत्व कर रहा था, जबकि अबू मुआविया वर्ष 2023 से सक्रिय था और कई आतंकी घटनाओं में संलिप्त रहा है। इस मॉड्यूल का एक अन्य सदस्य उस्मान पहले ही एक मुठभेड़ में मारा जा चुका है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अभी तक आतंकियों की पहचान और संगठन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। क्षेत्र में दो अन्य आतंकियों की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है।
भारी मात्रा में हथियार और सामग्री बरामद
मुठभेड़ स्थल से बड़ी मात्रा में हथियार और रसद सामग्री बरामद की गई है, जो इस बात का संकेत देती है कि आतंकी लंबे समय तक गुफा में छिपे रहने की तैयारी के साथ आए थे। बरामद सामग्री में एक एम4 कार्बाइन (क्षतिग्रस्त अवस्था में), एक एके-56 राइफल, दो एम4 मैगजीन, चार एके-56 मैगजीन, एम4 की 89 गोलियां और एके-56 की 57 गोलियां शामिल हैं। इसके अलावा तीन जिंदा चीनी ग्रेनेड (86 पी मॉडल), दवाएं, सीरिंज, नेट कटर, चाकू, कैंची, टॉर्च, स्लीपिंग बैग, प्लास्टिक तिरपाल, कंबल, शाल, जूते, खजूर का पैकेट, टॉफियां, डायरी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (चार्जर और यूएसबी केबल) भी मिले हैं। यह संकेत देता है कि आतंकी लंबी अवधि तक जंगल में छिपकर गतिविधियां संचालित करने की योजना में थे।
किश्तवाड़: दो से तीन फीट बर्फ के बीच मुठभेड़
दूसरी बड़ी कार्रवाई किश्तवाड़ जिले के छात्रू क्षेत्र के दिच्छड़ जंगल में हुई। यहां सुरक्षाबल पिछले करीब 20 दिनों से आतंकियों की तलाश में लगातार तलाशी अभियान चला रहे थे। बुधवार शाम करीब 5:45 बजे सुरक्षाबलों का आतंकियों से आमना-सामना हो गया। आतंकियों ने कथित तौर पर ग्रेनेड से हमला करते हुए गोलीबारी शुरू की, जिसका सुरक्षाबलों ने जवाब दिया। मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया। इलाके में दो से तीन फीट तक बर्फ जमी हुई है और पिछले दो सप्ताह से रुक-रुक कर बर्फबारी हो रही है, जिससे अभियान और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
पिछले 18 दिनों में पांच मुठभेड़
किश्तवाड़ के जंगलों में हालिया समय में सुरक्षा गतिविधियां तेज हुई हैं। पिछले 18 दिनों में यहां पांच मुठभेड़ हो चुकी हैं। 18 जनवरी को हुई मुठभेड़ में एक जवान बलिदान हो गया था और सात अन्य घायल हुए थे। इसके बाद 22, 25 और 31 जनवरी को भी सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ की घटनाएं हुईं। लगातार अभियान यह संकेत देता है कि क्षेत्र में सक्रिय आतंकी समूहों को खत्म करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां व्यापक रणनीति के तहत काम कर रही हैं।
चुनौतीपूर्ण भूगोल, लेकिन सतर्क बल
जम्मू संभाग के पहाड़ी और वन क्षेत्र लंबे समय से आतंकियों के लिए छिपने के सुरक्षित ठिकाने माने जाते रहे हैं। कठिन भूगोल, सीमित सड़क संपर्क और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां अभियानों को जटिल बनाती हैं। इसके बावजूद सेना, पुलिस और केंद्रीय बलों की संयुक्त टीमें समन्वित ढंग से अभियान चला रही हैं। ड्रोन तकनीक, सटीक खुफिया इनपुट और बहु-एजेंसी तालमेल ने हालिया अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सुरक्षा बलों का कहना है कि क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित बनाने तक अभियान जारी रहेगा। शवों की पहचान और बरामद सामग्री की फोरेंसिक जांच के बाद विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है।
आगे भी जारी रहेगा अभियान
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, ऊधमपुर और किश्तवाड़ दोनों क्षेत्रों में तलाशी अभियान जारी है। आशंका है कि कुछ आतंकी अभी भी जंगलों में छिपे हो सकते हैं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। जम्मू संभाग में हालिया कार्रवाइयों को आतंकवाद के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सुरक्षा बलों की इस सफलता को क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि चुनौतियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
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