सोनम वांगचुक बोले-सरकार के खिलाफ बोला, मेरा एनकाउंटर हो सकता है: लेह हिंसा पर कहा- अमित शाह इस्तीफा दें
रैली को संबोधित करते हुए सोनम वांगचुक ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 2025 की हिंसा में हुई मौतों के लिए गृह मंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। वांगचुक ने पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग भी की।

लेह: लद्दाख के लेह में पिछले साल हुई हिंसा की पहली बरसी पर गुरुवार को लेह और कारगिल में बंद का आयोजन किया गया। लेह के एनडीएस मैदान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा और रैली में 24 सितंबर 2025 की हिंसा में मारे गए चार लोगों को याद किया गया। कार्यक्रम में मृतकों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे को बढ़ाकर एक-एक करोड़ रुपये करने की मांग उठी। इस दौरान पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार पर भी तीखे सवाल उठाए।
चार मृतकों को श्रद्धांजलि
लद्दाख बुद्धिस्ट एसोसिएशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने पिछले वर्ष की घटना में जान गंवाने वाले चार लोगों को श्रद्धांजलि दी। लेह अपेक्स बॉडी के पदाधिकारियों ने घटना की निष्पक्ष जांच और हिंसा के दौरान हुई मौतों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग दोहराई। वक्ताओं ने प्रशासन की ओर से मृतकों के परिवारों के लिए घोषित 15-15 लाख रुपये के मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाकर एक-एक करोड़ रुपये करने की मांग रखी।
वांगचुक ने अमित शाह पर लगाए आरोप
रैली को संबोधित करते हुए सोनम वांगचुक ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 2025 की हिंसा में हुई मौतों के लिए गृह मंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। वांगचुक ने पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट सामने नहीं लाई जाती है तो स्वतंत्र ‘पीपुल्स ट्रिब्यूनल’ बनाकर घटना की जांच कराई जानी चाहिए। वांगचुक ने अपने भाषण में यह आशंका भी जताई कि सरकार के खिलाफ बोलने की वजह से उन्हें किसी एनकाउंटर में मारा जा सकता है।। उनके ये बयान रैली में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय रहे।
राहुल गांधी के बयान का किया समर्थन
वांगचुक ने जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से की गई टिप्पणियों का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्री को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। हालांकि, पुलिस फायरिंग और हिंसा से जुड़े आरोपों की जिम्मेदारी तथा घटनाक्रम की परिस्थितियों पर अलग-अलग पक्षों के दावे रहे हैं। ऐसे में घटना की आधिकारिक जांच और उसके निष्कर्षों को सार्वजनिक किया जाना विवाद के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग
24 सितंबर 2025 को लेह में हुआ प्रदर्शन लद्दाख को राज्य का दर्जा देने, संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा और क्षेत्र के लिए जनजातीय दर्जे समेत कई मांगों को लेकर शुरू हुआ था। इससे पहले सोनम वांगचुक ने 10 सितंबर 2025 को लेह में भूख हड़ताल शुरू की थी। इसके बाद 24 सितंबर को प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यालय और लेह स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद परिसर के बाहर स्थिति बिगड़ गई थी। पुलिस कार्रवाई के दौरान चार लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए थे। घटना के बाद केंद्र और लद्दाख प्रशासन की ओर से हिंसा के लिए कथित भड़काऊ बयानों को जिम्मेदार ठहराया गया था। इसके बाद सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
पदयात्रा के जरिए भी जताया विरोध
हिंसा की पहली बरसी से एक दिन पहले वांगचुक ने लेह में पदयात्रा का नेतृत्व किया था। इस दौरान भी पिछले साल की घटना में मारे गए लोगों के लिए न्याय और लद्दाख की मांगों को लेकर आवाज उठाई गई। पहली बरसी पर हुए कार्यक्रम में आंदोलन से जुड़े संगठनों ने अपनी मांगों को दोहराते हुए केंद्र और प्रशासन से बातचीत तथा लंबित मुद्दों के समाधान की अपील की।
20 लोगों पर दर्ज मामले वापस लेने की मंजूरी
इस बीच लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने 24 सितंबर 2025 की लेह हिंसा से जुड़े 20 लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों को वापस लेने की मंजूरी दी है। यह फैसला भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 360 के तहत लिए जाने की जानकारी है। लद्दाख पुलिस की ओर से मामलों की जांच की स्थिति की समीक्षा के बाद इन्हें वापस लेने की सिफारिश की गई थी। हिंसा के बाद पुलिस ने दंगा, आगजनी समेत विभिन्न धाराओं में कई मामले दर्ज किए थे।


