जम्मू-कश्मीर में सियासी बवाल, सीएम उमर के स्टेटहुड प्रस्ताव पर घमासान, बीजेपी ने स्पीकर के खिलाफ खोला मोर्चा
जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। मौजूदा विवाद में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा विधानसभा में प्रस्ताव पेश किए जाने के तरीके को लेकर बीजेपी और सत्ता पक्ष आमने-सामने हैं।

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव को लेकर शुरू हुआ विवाद अब विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर के खिलाफ अविश्वास और पद से हटाने की मांग तक पहुंच गया है। सोमवार, 28 सितंबर को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने स्पीकर पर सदन की कार्यवाही निष्पक्ष तरीके से संचालित नहीं करने का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया। इस दौरान विधानसभा में बीजेपी विधायकों ने जमकर हंगामा किया और वेल में धरना भी दिया।
स्पीकर के खिलाफ BJP ने रखा नोटिस
सोमवार को जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, बीजेपी विधायक स्पीकर की भूमिका को लेकर विरोध जताने लगे। पार्टी विधायकों ने अब्दुल रहीम राथर के खिलाफ नारेबाजी की और उनके इस्तीफे की मांग की। बीजेपी विधायक आर.एस. पठानिया ने सदन में बताया कि पार्टी की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए नोटिस दिया गया है। उनके मुताबिक, इस प्रस्ताव पर 23 बीजेपी विधायकों के हस्ताक्षर हैं और इसे सदन के सामने रखा गया है।
‘स्पीकर को कार्यवाही चलाने का अधिकार नहीं’
आर.एस. पठानिया ने स्पीकर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीजेपी ने उनके खिलाफ प्रस्ताव इसलिए पेश किया है क्योंकि पार्टी को लगता है कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें सदन की कार्यवाही संचालित नहीं करनी चाहिए। बीजेपी की ओर से अपने रुख के समर्थन में संवैधानिक प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिए जाने की बात भी सामने आई है। पार्टी का आरोप है कि स्पीकर ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश किए गए राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव को नियमों में कथित तौर पर ढील देकर मंजूरी दी।
शुक्रवार को स्टेटहुड प्रस्ताव पर हुआ था हंगामा
विवाद की शुरुआत शुक्रवार, 25 सितंबर को हुई थी। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग से जुड़ा प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया था। प्रस्ताव पेश होने के बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ। बीजेपी ने प्रस्ताव की प्रक्रिया और उसमें शामिल संदर्भों को लेकर आपत्ति जताई थी। बताया गया है कि प्रस्ताव में 2000 और 2024 में पारित पुराने प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया था। इसी मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और बीजेपी विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
BJP का आरोप- नियमों में दी गई ढील
बीजेपी का कहना है कि मुख्यमंत्री की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव को स्पीकर ने जिस तरह सदन में स्वीकार किया, वह विधानसभा के नियमों के अनुरूप नहीं था। पार्टी इसी निर्णय को स्पीकर के खिलाफ कार्रवाई की अपनी मांग का प्रमुख आधार बता रही है। सोमवार को बीजेपी विधायकों ने इसी मुद्दे को लेकर सदन के भीतर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान विधायक वेल में पहुंच गए और स्पीकर के खिलाफ नारेबाजी की।
NC विधायक ने BJP के रवैये पर जताई नाराजगी
बीजेपी के विरोध के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायक नजीर गुरेजी ने बीजेपी विधायकों के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्पीकर से कहा कि वह बीजेपी विधायकों को जिस तरह बर्दाश्त कर रहे हैं, उतना कोई और नहीं कर सकता। गुरेजी ने बीजेपी विधायकों पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा, “आप यहां गुंडागर्दी करने आए हो, हम अपने मसलों का हल करने आए हैं, लेकिन आप दंगा कर रहे हो।” यह बयान सदन में जारी तीखी राजनीतिक तनातनी को दर्शाता है।
स्टेटहुड का मुद्दा बना टकराव की वजह
जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। मौजूदा विवाद में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा विधानसभा में प्रस्ताव पेश किए जाने के तरीके को लेकर बीजेपी और सत्ता पक्ष आमने-सामने हैं। बीजेपी का कहना है कि प्रस्ताव को मंजूरी देने में स्पीकर ने नियमों का पालन नहीं किया, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से बीजेपी के विरोध को सदन की कार्यवाही बाधित करने वाला बताया जा रहा है। अब स्पीकर के खिलाफ पेश किए गए प्रस्ताव पर आगे की विधानसभा प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि शुक्रवार के स्टेटहुड प्रस्ताव को लेकर उठे विवाद का सदन की आगामी कार्यवाही पर क्या असर पड़ता है।


