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जम्मू-कश्मीर: गबन मामले में एसीबी का शिकंजा, पूर्व बीडीओ समेत कई अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

जम्मू-कश्मीर एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सरकारी फंड के गबन के मामले में एक पूर्व ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ), एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और पांच अन्य लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है।

जम्मू-कश्मीर: गबन मामले में एसीबी का शिकंजा, पूर्व बीडीओ समेत कई अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बुधवार को सरकारी फंड के गबन के मामले में एक पूर्व ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ), एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और पांच अन्य लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है।

इसे लेकर एसीबी ने एक बयान में कहा गया है, "एसीबी जम्मू-कश्मीर ने बारामूला के एंटी-करप्शन स्पेशल जज की अदालत में एफआईआर के तहत छह सरकारी कर्मचारियों और एक ठेकेदार के खिलाफ चार्ज-शीट दाखिल की है। इन पर कुपवाड़ा जिले के लोलाब/लालपोरा ब्लॉक में विकास कार्यों के लिए मिले सरकारी फंड में भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और गबन में शामिल होने का आरोप है।"

यह मामला कुपवाड़ा के लोलाब ब्लॉक में ग्रामीण विकास विभाग के जरिए किए गए विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत से शुरू हुआ था।

तत्कालीन विजिलेंस ऑर्गनाइजेशन कश्मीर (अब एंटी-करप्शन ब्यूरो) की जांच में 'मार्गी डाइवर (करिवां) फेज-I में सरबंद का निर्माण' और 'डाइवर-बी में मछली पालन तालाब का निर्माण' जैसे कार्यों को पूरा करने में गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं।

एसीबी ने बताया कि जांच में गलत माप, ऐसे काम के लिए बिल बनाना जो हुआ ही नहीं, जरूरी इजाजत के बिना वन भूमि पर काम करना और खराब या घटिया काम के लिए पेमेंट जारी करने जैसी बातें सामने आईं।

इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई और जांच शुरू हुई। जांच में पता चला कि आरोपी सरकारी कर्मचारियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने धोखाधड़ी से काम पूरा करने, गलत रिकॉर्ड बनाने, माप बढ़ाकर दिखाने और सरकारी फंड को बिना इजाजत जारी करने में मदद की।

जांच में सरकारी खजाने को नुकसान होने का पता चला, जो ऐसे कामों के कारण हुआ जो हुए ही नहीं थे या जिनमें माप बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था, काम घटिया था और गलत दावे किए गए थे। यह भी पता चला कि बिल बढ़ाने और गलत तरीके से आर्थिक फायदा उठाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में पेड़ काटने से जुड़ी फर्जी एंट्री की गई थीं।

नौकरी कर रहे सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सक्षम अधिकारी से जरूरी मंजूरी मिलने के बाद, एंटी-करप्शन ब्यूरो ने जिन लोगों खिलाफ चार्ज-शीट दाखिल की, उनमें मो सुल्तान भट (तत्कालीन ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर, सोगम/लालपोरा), इंजीनियर सुरिंदर कुमार शर्मा (तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, आरईडब्ल्यू डिवीजन कुपवाड़ा), मो शफी बुखारी (तत्कालीन असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, आरईडब्ल्यू कुपवाड़ा), तैमूर अहमद खान (तत्कालीन जूनियर इंजीनियर, आरईडब्ल्यू लालपोरा), निसार अहमद खान (तत्कालीन जूनियर इंजीनियर, आरईडब्ल्यू लालपोरा), मो सलीम डार (जो उस समय विलेज लेवल वर्कर/पंचायत सचिव थे) और वसीम महमूद खान (लाभार्थी ठेकेदार) शामिल हैं।

सभी आरोपियों को अदालत के सामने पेश किया गया और अदालत की संतुष्टि के अनुसार पर्सनल बॉन्ड भरने पर उन्हें जमानत दे दी गई।

आरोपियों पर जम्मू-कश्मीर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2006 की धारा 5(1)(सी) के साथ धारा 5(1)(डी) और धारा 5(2), और रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) के अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत अपराधों के लिए आरोप-पत्र (चार्ज-शीट) दाखिल किया गया है अदालत ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख 25 अगस्त, 2026 तय की है।

बयान में कहा गया, "जम्मू-कश्मीर का भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, भ्रष्टाचार के मामलों की गहन, निष्पक्ष और तेजी से जांच करने और यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर अडिग है कि भ्रष्टाचार और सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को कानून के अनुसार सजा दिलाई जाए।"


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