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जम्मू-कश्मीर: सेना ने नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिश नाकाम की, मारा गया आतंकवादी

जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर भारतीय सेना के जवानों ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। इस दौरान एक घुसपैठिया आतंकवादी मारा गया।

जम्मू-कश्मीर: सेना ने नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिश नाकाम की, मारा गया आतंकवादी
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर मंगलवार को भारतीय सेना के जवानों ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। इस दौरान एक घुसपैठिया आतंकवादी मारा गया।

नागरोटा स्थित सेना की व्हाइट नाइट कोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, ''लगातार निगरानी के दौरान शाम करीब 4 बजे कृष्णा घाटी सेक्टर, पुंछ में नियंत्रण रेखा के पास भारतीय क्षेत्र के लगभग 300 मीटर अंदर संदिग्ध गतिविधि देखी गई।''

पोस्ट में कहा गया, "व्हाइट नाइट कोर के सतर्क जवानों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया और नियंत्रण रेखा पर किसी भी तरह की सेंध नहीं लगने दी। एक घुसपैठिए को मार गिराया गया है। हमारे जवान इलाके में पूरी तरह तैनात हैं और पूरे सेक्टर में उच्च स्तर की सतर्कता बनाए हुए हैं।''

पोस्ट में आगे कहा गया, "नाइट कोर हमेशा सतर्क है। हर घुसपैठ की कोशिश नाकाम होगी। हम सेवा करते हैं, हम सुरक्षा करते हैं!''

सेना के अनुसार, यह घटना कृष्णा घाटी के अग्रिम इलाके में नियंत्रण रेखा पर हुई, जब सतर्क जवानों ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे आतंकवादियों के एक समूह को देखा और उन्हें चुनौती दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई।

इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है।

जम्मू-कश्मीर में लगभग 740 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा है, जो कश्मीर घाटी के बारामूला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों तथा जम्मू संभाग के पुंछ, राजौरी और जम्मू जिले के कुछ हिस्सों से होकर गुजरती है।

इसके अलावा, जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों से होकर करीब 240 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा भी गुजरती है।

नियंत्रण रेखा की सुरक्षा भारतीय सेना करती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय सीमा की निगरानी सीमा सुरक्षा बल करता है।

सेना और बीएसएफ की तैनाती घुसपैठ, तस्करी, ड्रोन गतिविधियों और सीमा पार से आतंकवादी संगठनों द्वारा की जाने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए की गई है। इन गतिविधियों में पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस की मदद होने का भी आरोप है।

इन ड्रोन का इस्तेमाल हथियार, गोला-बारूद, नकदी और ड्रग्स गिराने के लिए किया जाता है, जिन्हें आतंकवादी संगठनों के ओवरग्राउंड वर्कर उठाकर आतंकियों तक पहुंचाते हैं, ताकि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा सके।


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