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'राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा अमन और शांति पर ध्यान देना जरूरी,' पीओजेके मुद्दे पर बोलीं नीलोफर मसूद

जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) महिला विंग की बारामूला जिला अध्यक्ष और वकील नीलोफर मसूद ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) की स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया दी है

राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा अमन और शांति पर ध्यान देना जरूरी, पीओजेके मुद्दे पर बोलीं नीलोफर मसूद
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बारामूला। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) महिला विंग की बारामूला जिला अध्यक्ष और वकील नीलोफर मसूद ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) की स्थिति को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी से अधिक जरूरी क्षेत्रीय विकास, शांति और स्थानीय समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना है।

नीलोफर मसूद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े जो भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर क्षेत्रीय स्तर पर देखा जाए तो यहां लोगों की अपनी आवश्यकताएं और अपेक्षाएं हैं, जिन पर ध्यान देना अधिक जरूरी है। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों के भीतर क्या विचारधाराएं हैं या वे किस प्रकार के बयान दे रहे हैं, यह उनका आंतरिक मामला है, लेकिन जनता के हितों और क्षेत्रीय शांति पर ध्यान केंद्रित करना अधिक महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि उनका और उनकी पार्टी का हमेशा से यह प्रयास रहा है कि पूरे क्षेत्र में शांति और सौहार्द का संदेश दिया जाए। उनके अनुसार, जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति स्थापित करना सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसके लिए सभी पक्षों को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

नीलोफर मसूद ने कहा कि वे अल्लाह से दुआ करती हैं कि सीमावर्ती क्षेत्रों में भी शांति स्थापित हो और वहां सामान्य स्थिति बहाल हो। उन्होंने कहा कि शांति और स्थिरता केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आम जनता की सुरक्षा, विकास और भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है।

उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के लोगों के बीच ऐतिहासिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब सीमाओं के पार लोगों का आना-जाना अपेक्षाकृत आसान था और परिवारों के बीच संपर्क बना रहता था। ऐसे में वर्तमान तनावपूर्ण स्थिति का प्रभाव दोनों ओर के लोगों पर पड़ता है।

नीलोफर मसूद ने कहा कि इन रिश्तों और भावनात्मक जुड़ाव के कारण आम लोग हमेशा शांति की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने कहा कि सीमा पार रहने वाले लोगों के रिश्तेदार यहां भी हैं और ऐसे में तनाव या संघर्ष की स्थिति दोनों ओर चिंता का कारण बनती है।


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