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पहाड़ों से घिरा बुरगुम पंचायत सुविधाओं से दूर,ग्रामीण झरिया के पानी से बुझा रहे प्यास

जगदलपुर ! संभागीय मुख्यालय से लगभग 60 किमी दूर ग्राम पंचायत बुरगुम चारों ओर पहाड़ी से घिरा है। यहां के ग्रामीण एवं बच्चे शासन-प्रशासन से मिलने वाले सुविधाओं से कोसों दूर है।

पहाड़ों से घिरा बुरगुम पंचायत सुविधाओं से दूर,ग्रामीण झरिया के पानी से बुझा रहे प्यास
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जगदलपुर ! संभागीय मुख्यालय से लगभग 60 किमी दूर ग्राम पंचायत बुरगुम चारों ओर पहाड़ी से घिरा है। यहां के ग्रामीण एवं बच्चे शासन-प्रशासन से मिलने वाले सुविधाओं से कोसों दूर है। ग्रामीण ग्राम में पेयजल नहीं होने के कारण वर्षों से पहाड़ के निकट स्थित झरिया के पानी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
जहां एक ओर शासन-प्रशासन द्वारा सभी ग्रामों को आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर से महज 60 किलोमीटर दूर स्थित अतिसंवेदनशील एवं चारों ओर से पहाड़ों ग्राम पंचायत बुरगुम के ग्रामीण विभिन्न मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। इस ग्राम में 6 पारा पटेलपारा, कावड़ीपदर, गुट्टापारा, सुकड़ापारा, मुसकड़मपारा है। ग्राम पंचायत में 250 घर है, जिसकी जनसंख्या लगभग 1200 है। ग्रामीणों की पेयजल सुविधा के लिए 4 बोरिंग है, पर वर्षों से दो बोरिंग खराब हो गए हैं। इसके चलते ग्रामीणों को गांव से लगभग 3 किमी दूर झरिया के पानी से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। ग्राम के उप सरपंच बोमड़ाराम ने बताया कि मुतनपाल से कावड़ीपदर तक 6 किमी सडक़ नहीं होने से ग्रामीणों को पगडंडी का सहारा लेना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि उक्त सडक़ के लिए लगभग 3 वर्ष पूर्व स्वीकृत किया गया था, पर अब तक कुछ नहीं हो सका। ग्रामीणों ने ग्राम में बोरिंग मरम्मत,सीसी सडक़ एवं पुलिया की मांग की जा रही है।
ग्राम के सुकड़ापारा, गुट्टापारा एवं कावड़ीपदर में बोरिंग खराब होने कारण महिलाओं भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। पानी लेने जा रही बुरगुम की महिलाएं विनीता, मोटली धु्रव व मोती बाई एवं सुको ने कहा कि पेयजल सुविधा नहीं होने के कारण झरिया के पानी का उपयोग कर रहे हैं। महिलाओं ने यह भी कहा कि पानी के लिए हम जाएं तो जाएं कहां,हमारी कोई नहीं सुनता। उन्होंने यह भी बताया कि गर्मी के समय में झरिया का पानी सूख जाता है। तब उन्हें आसपास के गांवों की शरण लेनी पड़ती है।
ग्राम पंचायत बुरगुम के उप सरपंच बोमड़ाराम एवं पूर्व सरपंच मोहन मंडावी ने बताया कि ग्राम में सडक़ नहीं है। ग्राम में आश्रम है, जिसमें 50 बच्चे दर्ज हैं। यहां माध्यमिक शाला भवन बनाया गया था। जिसमें माध्यमिक शाला के बच्चे नहीं होने से उक्त भवन को बालक आश्रम बना दिया। वर्तमान माध्यमिक शाला के बच्चों का 6 किमी दूर जाना पड़ रहा है। बुरगुम में माध्यमिक शाला भवन की मांग की जा रही है।
जिले के 22 थानों में से बुरगुम एक ऐसा थाना है, जहां क्राईम बहुत कम है। वर्ष 2015 में बस्तर जिले का नक्सल क्षेत्र प्रभावित बुरगुम थाना का उदघाटन किया गया है। इस थाना में पहले साल सिर्फ 5 मामले दर्ज हुए। जिसमें एक मात्र नक्सली का मामला था। वहीं वर्ष 2016 में सिर्फ 8 मामले दर्ज हुए। इस मामले में जिले के एएसपी विजय पांडे ने कहा कि नक्सली जैसे-जैसे पीछे हटते जा रहे हैं वैसे-वैसे क्राईम कम होता जा रहा है। -


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