Top
Begin typing your search above and press return to search.

नए लड़ाकों को हमले की ट्रेनिंग देने नक्सलियों ने किया था हमला

जगदलपुर ! छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सोमवार को हुए हमले में 25 जवानों की शहादत के बाद अब इसके कई मकसद सामने आ रहे हैं। नक्सलियों ने यह हमला कर अपनी तगड़ी मौजूदगी का एहसास तो करवाया ही,

नए लड़ाकों को हमले की ट्रेनिंग देने नक्सलियों ने किया था हमला
X

जगदलपुर ! छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सोमवार को हुए हमले में 25 जवानों की शहादत के बाद अब इसके कई मकसद सामने आ रहे हैं। नक्सलियों ने यह हमला कर अपनी तगड़ी मौजूदगी का एहसास तो करवाया ही, इसके अलावा यह हमला टीसीओसी के दौरान भर्ती किए नए लाल लड़ाकों के लिए भी महत्वपूर्ण था।
जंगल से जो खबर निकलकर आई है, उसके अनुसार नक्सलियों का टीसीओसी, टैक्टिकल काउंटर अफेंसिव कैंपेन पिछले माह 8 मार्च से शुरू हुआ था। आमतौर पर पतझड़ के बाद नए लड़ाकों को नक्सली अपने संगठन से जोडऩे के बाद सही समय पर कैसे करते हैं हमला, रियल टाइम प्रैक्टिस और एंबुश में कैसे जवानों को फंसाकर मारा जाए, इसकी ट्रेनिंग भी देते हैं। इसके अलावा गोलीबारी के बीच में कैसे शहीद हुए जवानों के हथियार लूटने हैं, इसकी जानकारी भी लाइव दी जाती है। बुरकापाल में भी नक्सलियों ने यही किया।
सब कुछ ऐसा अप्रत्याशित हुआ कि संभलने का मौका ही नहीं मिला -केन्द्रीय रिजर्व बल पर हमले में नक्सली चाणक्य सूझ-बूझ के तौर पर एंबुश ले कर एक बड़ी घटना को अंजाम देने में सफल हुए। चिंतागुफा थाने में अपनी सेवा दे रहे जवान, निर्माणधीन सडक़ के कार्य के लिए रोड ओपनिंग पर निकल महज थाना से डेढ़ किलोमीटर दूर इस तरह फंसे कि समझने तथा जवाबी कार्रवाई करने का मौका ही नहीं तलाश पाए।
नुकसान का अंदेशा नहीं था-नक्सलियों इस बात की पुख्ता जानकारी थी कि सीआरपीएफ की इस पार्टी में कोबरा के जवान नहीं हैं। ऐसे में नए लडक़ों को इस एंबुश में शामिल करने से ज्यादा नुकसान होने का अंदेशा भी नहीं था।
पुलिस के हर मूव्मेंट की जानकारी थी -सर्चिंग पर निकले जवानों के लिए एंबुश लगाने के लिए सभी हार्डकोर नक्सलियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जंगलों से जो खबरें निकलकर आई हैं उसके अनुसार चिंतागुफा थाने से जब जवान रोड ओपनिंग पर निकले तब उनके कैंप से निकलते ही इनकी हर मूवमेंट की खबरें जंगलों में जा रही थी। दूसरे शब्दों में कैंप से निकलते ही जवान नक्सलियों की निगरानी में थे। बुरकापाल तक पहुंचने से पहले ही जवानों के लिए एंबुश तैयार कर लिया गया था। जवानों पर हमला करने के लिए नक्सलियों नेे पूरी प्लानिंग कर रखी थी। 300 से ज्यादा नक्सली अलग-अलग तीन स्थानों पर एंबुश लगाए बैठे थे।
नक्सलियों के तीन पार्टी डटी थी -बताया जा रहा है कि नक्सलियों की पहली पार्टी ने जवानों पर हमला बोला पर यह हमला कारगार साबित नहीं हो पाया और इसमें कुछ जवान घायल हुए और कुछ शहीद हो गए। घायल जवानों की माने तो नक्सली पहाड़ों, पेड़ों में पहले से ही मौजूद थे। इसके बाद तीनों ओर से अचानक ही जवानों पर फायर खोल दिया गया। जिस नुकसान के उद्देश्य से जवानों के लिए नक्सलियों ने पहला और बड़ा एंबुश लगाया था उसे जवाबी कार्रवाई से फेल कर दिया था। जवानों ने नक्सलियों के इस एंबुश को तोडक़र आगे बढऩा शुरू किया तो नक्सलियों की दूसरी पार्टी ने दोबारा हमला कर दिया। जब जवानों ने इस हमले का भी मुंहतोड़ जवाब दिया तो तीसरी पार्टी ने हमला बोला। तीसरी मुठभेड़ होते तक शाम ढल चुकी थी और फोर्स का असलहा भी काफी तादाद में खर्च हो चुका था। बावजूद इसके जवानों ने हौसला नहीं खोया और मोर्चे पर डटे रहे। माओवादियों ने आधुनिक हथियार यूबीजीएल (अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर) से 10 हाई एक्सप्लासिव बम भी दागे। एके 47, इंसास व 2 इंच मोर्टार का इस्तेमाल किया।
यू आकार लगाया एंबुश - नक्सलियों ने जवानों को फंसाने के लिए बुरकापाल के पास यू आकार का एंबुश लगा रखा था। सुरक्षित निकलकर आए जवानों की मानें तो इस गांव से कुछ दूर पहले जवान भोजन करने के लिए बैठे हुए थे। इसी बीच नक्सलियों ने फायर खोल दिया। जवान गांव की ओर कुछ आगे बढ़े तो यहां राउंड शेप में नक्सलियों ने मोर्चा संभाल रखा था। यहां तक कि आसपास के पेड़ों पर और पहाड़ी तक में नक्सली मौजूद थे।
काली वर्दी वाले नक्सली ज्यादा थे- घायल जवानों के मुताबिक ज्यादातर नक्सलियों ने काली वर्दी पहनी हुई थी। पहाड़ों और पेड़ों पर छिपे ज्यादातर नक्सली काली वर्दी में ही थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में नक्सली ग्रामीण वेशभूषा में थे। फायरिंग की आवाज को सुनकर जवानों ने अंदाजा लगाया कि वे एसएलआर, इंसास जैसी बंदूकों से फायर कर रहे थे। मौका पाते ही नक्सलियों ने यूबीजीएल ( एसएलआर व इंसास रायफल की नली में अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर को फिट कर भरपूर इस्तेमाल किया। यूबीजीएल के घातक वार को झेलना जवानों के लिए भारी पड़ा। पहले ही दौर के घातक हमले में 12 जवान शहीद हो गए। इसके तुरंत बाद नक्सलियों ने फायरिंग भी झोंक दी।
अंत तक साहस से मोर्चे पर जुटे रहे जवान - बुरकापाल के जंगलों में सौ से ज्यादा जवान घंटों मौत के मुंह में रहे। चारों ओर से नक्सलियों से घिरने और पहली ही गोलीबारी में एक दर्जन जवानों के घायल होने के बाद भी जवानों ने अपना हौसला नहीं खोया और मौत से मुकाबला करते रहे। इस पूरे एनकाउंटर में सबसे खास बात यह कि चारों ओर से नक्सलियों से घिरने के बाद भी जवानों ने जिंदादिली ने ही ज्यादा नुकसान होने से बचाया। बार-बार नक्सलियों के एंबुश को तोडऩे के बाद जवानों ने जंगलों में ही डेरा डालकर मोर्चा संभालने का निर्णय लिया। सीआरपीएफ की इस पार्टी में कई जवान घायल थे पर घायल जवानों और अन्य को पता था कि यदि इस दिशा में आगे बढ़े तो पहले से घात लगाए नक्सली बड़ा नुकसान पहुंचाएगे। ऐसे में जवानों ने एक ही स्थान पर मोर्चा बनाया और नक्सलियों के एंबुश के प्लान को काफी हद तक फेल कर दिया।
महिला नक्सली भी मौजूद थीं- जवानों ने बताया कि माओवादियों की संख्या 300 से भी ज्यादा थी। इनमें महिलाएं भी काफी संख्या में थीं। जवान ने दावा किया कि ग्रामीणों ने माओवादियों की पूरी मदद की और इन्हीं ग्रामीणों की आड़ में माओवादियों ने अत्याधुनिक हथियारों से हमले किए। शेर मोहम्मद ने कहा उसने खुद कई माओवादियों को मार गिराए हैं। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 12 से ज्यादा माओवादी भी ढेर हुए हैं।


Next Story

Related Stories

All Rights Reserved. Copyright @2019
Share it