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सेंट पीटर्सबर्ग से मुंबई तक रास्ता पूरा करने के लिए ईरान-रूस में समझौता

रूस और ईरान के बीच भारत और खाड़ी देशों को जोड़ने वाले ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को पूरा करने को लेकर समझौता हो गया है. पश्चिमी समुद्री रास्तों को टालने वाला यह ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तीन साल में पूरा किया जाएगा.

सेंट पीटर्सबर्ग से मुंबई तक रास्ता पूरा करने के लिए ईरान-रूस में समझौता
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ईरान और रूस मिलकर भारत और खाड़ी देशों को जोड़ने वाले रास्ते को पूरा करेंगे. यह रास्ता पूरा हो जान के बाद पश्चिमी समुद्री रास्तों की जरूरत नहीं रहेगी. ईरान के परिवहन मंत्री मेहरदाद बजरपाश और रूसी परिवहन मंत्री ने इस समझौते पर बुधवार को दस्तखत किये.

इसके तहत ईरान के उत्तर में 164 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन बनाई जाएगी. ईरान के दक्षिणी तट पर समुद्री परिवहन मार्ग को रूस से जोड़ने के लिए रास्ते का यही हिस्सा अधूरा है. इसके पूरा होने के बाद रूस से भारत तक एक सीधा व्यापार मार्ग तैयार हो जाएगा.

रूस और ईरान दोनों ही पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंध झेल रहे हैं. समुद्र, रेल और सड़क के जरिये यह रास्ता उन्हें रूस से भारत के बीच व्यापार के लिए ऐसा मार्ग उपलब्ध कराता है, जिसमें पश्चिमी देशों के प्रभाव वाले समुद्री रास्तों से नहीं गुजरना होगा. इन समुद्री रास्तों में भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ने वाली स्वेज नहर भी शामिल है, जहां से रूस के समुद्री जहाजों को गुजरना पड़ता है.

पीटर्सबर्ग से मुंबई तक

ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी भी हस्ताक्षर समारोह में शामिल हुए. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस समारोह में वीडियो लिंक के जरिये हिस्सा लिया. दोनों नेताओं ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह बड़े आर्थिक मौके लेकर आया है. जो मार्ग बनाया जाएगा, वह उत्तरी ईरान के शहर राश्त को अजरबैजान से लगती सीमा पर अस्तारा तक जाएगा.

बजरपाश ने कहा कि राश्त-अस्तारा रेलवे लाइन पर काम शुरू करने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है और तीन साल के भीतर इसे पूरा कर लिया जाएगा. रईसी ने कहा कि जब यह रेलवे मार्ग पूरा हो जाएगा तो इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ाने में सहायक होगा.

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रईसी ने कहा, "रूस के साथ व्यापार में बड़ी संभावनाएं हैं. ताजा समझौता ईरान और रूस के बीच सहयोग की दिशा में एक अहम कदम है.”

रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि नए निवेश और रोजगार से तेहरान और मॉस्को, दोनों को आर्थिक लाभ होगा. उन्होंने कहा, "उत्तर और दक्षिण को जोड़ने वाला यह अनूठा मार्ग अंतरराष्ट्रीय परिवहन को बड़े पैमाने पर बढ़ाएगा. नए मार्ग से सामान के परिवहन का बड़ा फायदा होगा.

(रूस में) सेंट पीटर्सबर्ग से (भारत में) मुंबई तक सामान ले जाने में करीब 10 दिन लगेंगे जबकि पारंपरिक रास्ते से इसमें 30 से 45 दिन लगते हैं.” पुतिन ने कहा कि रूस और ईरान अपने आर्थिक और व्यापार संबंधों को मजबूत करने को लेकर बेहद उत्सुक हैं.

फरवरी 2022 में रूस ने जब यूक्रेन पर हमला किया, उसके बाद पश्चिम देशों, खासकर अमेरिका ने उस पर कड़े आर्थिक और वित्तीय प्रतिबंध लगाये हैं. इस कारण उसके लिए व्यापार करना मुश्किल हो गया है. उधर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के कारण पहले से ही पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है.

प्रतिबंधों के बावजूद बढ़ता व्यापार

अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ईरान रूस को हमलावर ड्रोन सप्लाई कर रहा है. हालांकि ईरान इससे इनकार करता है लेकिन पश्चिमी देशों ने इस आधार पर नए प्रतिबंधों का ऐलान किया है. हालांकि प्रतिबंधों के बाद दोनों देशों ने एक दूसरे के साथ सहयोग का दायरा बढ़ाया है और वे विभिन्न क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करने पर बातचीत कर रहे हैं.

मंगलवार को अमेरिका ने कहा कि दोनों प्रतिबंधित देश "अभूतपूर्व रक्षा सहयोग बढ़ा रहे हैं.” अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन कर्बी ने कहा, "आधुनिक हथियारों, खासतौर पर ज्यादा आधुनिक चालक-रहित विमानों को लेकर ईरान और रूस के बीच संवाद जारी है.”

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मंगलवार को रूस के उप प्रधानमंत्री आलेक्सांद्र नोवाक ने ईरान का दौरा किया था और वहां के तेल मंत्री तेल और गैस के शोधन की नई परियोजनाएं शुरू करने पर चर्चा की. बुधवार को ईरानी तेल मंत्री जव्वाद ओव्जी ने कहा कि रूसी कंपनियों फिलहाल "ईरान के सात तेल क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं” और दोनों देशों के बीच छह अन्य क्षेत्रों में रूसी निवेश पर सहमति हुई है.

नोवाक ने कहा कि दोनों देशों ने 2030 तक एक दूसरे के बीच मालवहन की सीमा डेढ़ करोड़ सालाना तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है. इसके अलावा रूस के दूसरे सबसे बड़े बैंक वीटीबी ने हाल ही में ईरान में अपनी एक प्रतिनिधि शाखा भी शुरू की है क्योंकि दोनों देश प्रतिबंधों को टालने के लिए सीधी बैंकिंग व्यवस्था शुरू करने पर काम कर रहे हैं.


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