यमन में हूती-सऊदी संघर्ष तेज, ब्रिटेन ने बढ़ाया मदद का हाथ; भेजेगा टैंकर विमान
यमन में संघर्ष का एक अहम केंद्र लाल सागर के आसपास का क्षेत्र बनता जा रहा है। हूती लड़ाकों ने इस महीने लाल सागर के तटीय इलाकों की ओर अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं और बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास के क्षेत्रों में बढ़त बनाने का दावा किया है।

लंदन: यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच जारी संघर्ष के बीच ब्रिटेन ने रियाद को सैन्य सहायता देने का फैसला किया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने सोमवार को न्यूयॉर्क रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ब्रिटेन सऊदी अरब को एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग के लिए टैंकर विमान उपलब्ध कराएगा। इस व्यवस्था के तहत सऊदी लड़ाकू विमानों को हवा में ही ईंधन दिया जा सकेगा, जिससे उन्हें मिशन के दौरान बार-बार बेस पर लौटने की जरूरत कम होगी।
साइप्रस से ऑपरेशन कर सकता है RAF वॉयजर
ब्रिटेन की ओर से रॉयल एयर फोर्स (RAF) का वॉयजर टैंकर विमान तैनात किए जाने की संभावना है। यह विमान साइप्रस स्थित RAF अक्रोटिरी एयरबेस से अभियान में शामिल हो सकता है। वॉयजर को मुख्य रूप से हवा में उड़ रहे सैन्य विमानों में ईंधन भरने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस क्षमता से लड़ाकू विमानों की उड़ान अवधि बढ़ाई जा सकती है और वे लंबे समय तक अपने अभियान क्षेत्र में बने रह सकते हैं। ब्रिटिश वायुसेना के पास कुल नौ वॉयजर विमान हैं। इनमें आठ सैन्य इस्तेमाल के लिए हैं, जबकि एक विमान सिविलियन रजिस्ट्रेशन के तहत है, जिसे जरूरत पड़ने पर सैन्य भूमिका में लगाया जा सकता है। ब्रिटेन की ओर से सऊदी अरब को दी जाने वाली यह अतिरिक्त सहायता शुरुआती तौर पर कुछ सप्ताह के लिए होने की बात कही गई है। ब्रिटेन इस साल सऊदी अरब में स्काई सेबर एयर डिफेंस सिस्टम भी तैनात कर चुका है। यह प्रणाली ड्रोन और मिसाइल जैसे हवाई खतरों से बचाव के लिए इस्तेमाल की जाती है।
लाल सागर के करीब बढ़ी हूतियों की सक्रियता
यमन में संघर्ष का एक अहम केंद्र लाल सागर के आसपास का क्षेत्र बनता जा रहा है। हूती लड़ाकों ने इस महीने लाल सागर के तटीय इलाकों की ओर अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं और बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य के आसपास के क्षेत्रों में बढ़त बनाने का दावा किया है। बाब-अल-मंदब बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक व्यापार के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है। ऐसे में यहां संघर्ष बढ़ने से समुद्री परिवहन और जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है। हूतियों की बढ़ती गतिविधियों के जवाब में सऊदी अरब ने यमन के तटीय इलाकों में हवाई हमले किए हैं। दूसरी ओर, हूती समूह ने सऊदी शहरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर ड्रोन तथा मिसाइल हमले किए जाने का दावा किया है।
कई सऊदी शहर और ठिकाने निशाने पर होने का दावा
ब्रिटिश सरकार के अनुसार, जुलाई से हूतियों ने सऊदी अरब के कई शहरों, हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। इनमें अबहा, जिजान, नजरान, ताइफ, जेद्दा और यानबू जैसे स्थान शामिल हैं। सऊदी अरब और उसके सहयोगियों की ओर से यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा रही है। संघर्ष के बढ़ने से दोनों पक्षों के बीच हमलों का दायरा बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
मानवीय संकट भी गहराया
सैन्य तनाव का सबसे गंभीर असर यमन की आम आबादी पर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, संघर्ष बढ़ने के कारण अब तक 1.2 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। पिछले कुछ दिनों में 3,000 से ज्यादा यमनी शरणार्थियों के लाल सागर पार कर जिबूती पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है। यमन के सामने स्थित जिबूती ने इस संघर्ष में शामिल होने से दूरी बनाए रखी है। हालांकि, देश में अमेरिका और चीन समेत कई देशों की सैन्य मौजूदगी है। अमेरिका 2003 से यहां कैंप लेमोनियर सैन्य अड्डा संचालित करता है, जबकि चीन का भी जिबूती में सैन्य बेस है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ा दबाव
यमन में हूती-सऊदी संघर्ष अब केवल दोनों पक्षों तक सीमित सैन्य टकराव नहीं रह गया है। लाल सागर और बाब-अल-मंदब के आसपास बढ़ती गतिविधियों से समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आम नागरिकों के विस्थापन को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। ब्रिटेन की नई सैन्य सहायता से आने वाले दिनों में संघर्ष की दिशा और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसके असर पर नजर रहेगी।


