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पश्चिम एशिया में युद्ध का नया मोड़, ईरान के भीषण हमले में अमेरिकी 'थाड' रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान

रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने न केवल इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि जॉर्डन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर में स्थित कुछ महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को भी प्रभावित किया है।

पश्चिम एशिया में युद्ध का नया मोड़, ईरान के भीषण हमले में अमेरिकी थाड रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान
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तेहरान/तेल अवीव/वॉशिंगटन: West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष ने एक खतरनाक मोड़ ले लिया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने अमेरिका निर्मित टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) मिसाइल रक्षा प्रणाली के नेटवर्क को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। इन हमलों में कई महत्वपूर्ण रडार प्रणालियों को गंभीर नुकसान पहुंचने की खबर है, जिससे क्षेत्र में तैनात अमेरिकी और सहयोगी देशों की मिसाइल चेतावनी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने न केवल इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी, बल्कि जॉर्डन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर में स्थित कुछ महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को भी प्रभावित किया है।

रडार प्रणालियों को बनाया गया मुख्य निशाना

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि ईरान ने संघर्ष के शुरुआती चरण में ही उन रडार प्रणालियों को निशाना बनाया जो ‘थाड’ मिसाइल रक्षा प्रणाली का अहम हिस्सा हैं। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्ती एयर बेस पर तैनात AN/TPY-2 रडार सिस्टम पूरी तरह नष्ट हो गया है। यह अत्याधुनिक रडार सिस्टम कई बड़े ट्रेलरों में स्थापित होता है और लंबी दूरी से बैलिस्टिक मिसाइलों की पहचान करने में सक्षम होता है। सैटेलाइट तस्वीरों में इस क्षेत्र में मलबा, धुआं और जले हुए उपकरण दिखाई दिए हैं, जिससे भारी क्षति की आशंका जताई जा रही है। बताया जाता है कि एक ऐसे रडार सिस्टम की कीमत लगभग 500 मिलियन डॉलर (करीब 4,000 करोड़ रुपये) तक हो सकती है।

कई देशों के सैन्य ठिकानों पर असर

रिपोर्टों के अनुसार ईरान के हमलों का प्रभाव केवल जॉर्डन तक सीमित नहीं रहा। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर भी रडार और निगरानी प्रणालियों को नुकसान पहुंचने की खबर है। संयुक्त अरब अमीरात के रुवैस और सादेर सैन्य ठिकानों पर भी इसी तरह के हमलों के संकेत मिले हैं। इसके अलावा कतर में एक अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी सामने आई है। विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों का उद्देश्य अमेरिका और उसके सहयोगियों के व्यापक मिसाइल डिटेक्शन नेटवर्क को कमजोर करना हो सकता है।

इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने तेल अवीव और अन्य इजरायली शहरों की ओर कई चरणों में मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरानी मीडिया का दावा है कि इन हमलों में इस्तेमाल किए गए प्रोजेक्टाइल्स ने पश्चिमी और इजरायली मिसाइल रक्षा प्रणालियों को चकमा देने में सफलता पाई। इजरायली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तेल अवीव की ओर दागी गई आठ बैलिस्टिक मिसाइलों के कारण लाखों लोगों को सुरक्षा के लिए बंकरों में शरण लेनी पड़ी। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हमलों के दौरान इजरायल के रक्षा मंत्रालय परिसर और बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास के क्षेत्रों में भी खतरे की स्थिति पैदा हो गई थी। हालांकि इन हमलों से हुई वास्तविक क्षति के बारे में आधिकारिक पुष्टि सीमित है।

‘थाड’ प्रणाली क्यों है इतनी महत्वपूर्ण

‘थाड’ (THAAD) प्रणाली को दुनिया की सबसे उन्नत एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा तकनीकों में से एक माना जाता है। अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित यह प्रणाली दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को वायुमंडल के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर इंटरसेप्ट करने की क्षमता रखती है। इस प्रणाली की सफलता काफी हद तक AN/TPY-2 रडार पर निर्भर करती है, जो मिसाइल को बहुत दूर से पहचान कर इंटरसेप्टर मिसाइलों को सटीक निर्देश देता है।

‘रडार नष्ट होना बड़ी क्षति’

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रडार सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा है तो यह ‘थाड’ प्रणाली की कार्यक्षमता के लिए बड़ा झटका हो सकता है। अर्मामेंट रिसर्च सर्विसेज के निदेशक एनआर जेनजेन-जोन्स के अनुसार, “AN/TPY-2 रडार ‘थाड’ बैटरी का दिल है। इसके बिना इंटरसेप्टर मिसाइलों को सही दिशा देना बेहद मुश्किल हो जाता है। इतने महंगे और महत्वपूर्ण उपकरण का नष्ट होना एक बड़ी परिचालन क्षति है।”

क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर असर की आशंका

ईरान के इन हमलों ने यह संकेत दिया है कि वह क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति और उसके सहयोगियों की सुरक्षा व्यवस्था को सीधे चुनौती देने के लिए तैयार है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे हमले जारी रहते हैं तो इससे पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन बदल सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे पर गहरा असर पड़ सकता है। इन घटनाओं ने यह भी दिखाया है कि अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियां भी लगातार बदलती युद्ध रणनीतियों और मिसाइल तकनीकों के सामने पूरी तरह अजेय नहीं हैं।

व्यापक युद्ध की आशंका बढ़ी

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच लगातार बढ़ते हमलों और जवाबी हमलों ने पश्चिम एशिया में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंका को और बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास नहीं हुए तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है, जिसका असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।


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